258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
या वर्गों में, कुल जनता में खेतिहर मजदूरों के अनुपात में, बांटा जाए, अर्थात् वे
राज्य जहां 30 प्रतिशत से कम खेती और खेतिहर मजदूर रहते हैं, वे पहले वर्ग में
आएं, दूसरे वर्ग में 30 प्रतिशत से अधिक और 50 प्रतिशत से कम, तीसरे वर्ग में
50 से 70 प्रतिशत तक और चौथे वर्ग में 70 प्रतिशत से अधिक हों, तो खेतों का
मूल्य कृषि जनसंख्या के विलोम अनुपात में होता है। चौथे वर्ग में खेतों का मूल्य
केवल 5.28 डालर प्रति एकड़ है, तीसरे वर्ग में 13.03 डालर प्रति एकड़, अगले में
22.21 डालर प्रति एकड़ है और कारखानों वाले जिलों में 40.91 डालर है। इससे
पता चलता है कि मिश्रित जिला सबसे अधिक लाभकारी होता है, और न केवल
जमीन पर कीमत बढ़ जाती है, बल्कि प्रति एकड़ पैदावार भी ज्यादा होती है और
श्रमिकों को मिलने वावा वेतन भी अधिक होता है। इस तरह निर्माण कार्यों और
उद्योगों से न केवल निर्माताओं को लाभ होता है, अपितु उससे किसानों को भी
उतना ही लाभ होता है।
इससे पता चलता है कि हमारा उपाय परीक्षित है। यह निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि औद्योगीकरण से जोतों का आकार बढ़ाने को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही, और यह कि उप - विभाजन और विखंडन के विरुद्ध भी यह सबसे बड़ी रुकावट सिद्ध होगा। इस बात से सहमत होने पर यह दोखा जाएगा कि औद्योगीकरण चकबंदी कराने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं हैं। हो सकता है कि इसके लिए प्रत्यक्ष उपाय करने पड़ें। पर यह भी सच है कि औद्योगीकरण से अपने आप चकबंदी न हो, परन्तु उससे चकबंदी कराने में मदद मिलेगी। यह भी निर्विवाद सत्य है कि जब तक भूमि को महत्व मिलता है, चकबंदी करना आसान नहीं होगा, भले ही हम कितने भी न्यायोचित सिद्धांतों की बात करें। क्या यह औद्योगीकरण की कम सेवा है कि इसके कारण भूमि का महत्व कम हो जाता है। निश्चय ही नहीं। चकबंदी का एक और पहलू भी इसी निष्कर्ष की ओर इंगित करता है। वह यह है कि चकबंदी से पहले औद्योगीकरण होना चाहिए। यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जब तक चकबंदी वाली जोतों के भावी उप - विभाजन और विखंडन पर रोक लगाने के लिए प्रभावकारी रुकावटें नहीं लगाएंगे, तब तक चकबंदी की योजनाएं बनाना बेकार है। यह रुकावट केवल औद्योगीकरण से ही लगाई जा सकती है और तभी भूमि पर वह भारी दबाव कम हो सकता है, जिसके कारण भूमि का उप - विभाजन होता है। इसलिए यदि हमारी कृषि छोटी और बिखरी हुई जोतों की शिकार है, तो उसका हल निस्संदेह औद्योगीकरण करके ही निकल सकता है।
परंतु एक औद्योगिक देश के रूप में भारत का क्या स्थान है?