2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 61

44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मैं यह भी अनुभव करता हूं कि इस पत्रक का प्रकाशन सामयिक माना जाएगा। संघ एक बहुत ही जीवंत मुद्दा है और बहुत ही आवश्यक भी। बहुत जल्दी ही यह निर्णय लेने के लिए ब्रिटिश भारत के लोगों का आह्वान किया जाएगा कि क्या वे संघीय योजना को स्वीकार करेंगे अथवा नहीं। इस देश में कांग्रेस एक प्रमुख राजनीतिक संगठन है और वह इस संघ को स्वीकार करने के लिए इच्छुक है, जिस तरह उसने प्रांतीय स्वायत्तता को स्वीकार कर लिया है। मुस्लिम लीग के साथ की जा रही बातचीत और देशी राज्यों के साथ की जा रही सौदेबाजी से हर तरह मेरी यह धारणा पुष्ट होती है कि कांग्रेस संघ को स्वीकार करने के लिए तैयार है और यह बातचीत तथा सौदेबाजी अन्य दलों के साथ कामचलाऊ व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जा रही है, ताकि उनकी सहायता से कांग्रेस केन्द्र में सत्ता में आ सके, जैसा कि वह प्रांतों में है। श्री सुभाष चन्द्र बोस ने तो यहां तक संकेत दिया है कि कांग्रेस का दक्षिण पंथ संघ के प्रति इतना वचनबद्ध है कि उसने पहले ही अपने मंत्रिमंडल का चयन कर लिया है। यह कोई महत्व नहीं रखता कि यह सब कुछ सही है या नहीं। मुझे आशा है कि यह सब कुछ गलत है। चाहे जो कुछ भी हो, मामला गंभीर तथा नितांत आवश्यक है। और मैं समझता हूं कि उन सभी लोगों को, जो इस विषय पर कुछ कहना चाहते हैं, कहना चाहिए। वास्तव में, मेरा अनुभव है कि इस समय चुप रहना अपराध होगा। यही कारण है कि मैंने अपने व्याख्यान को प्रकाशित कराने में जल्दी की है। मेरा विश्वास है कि संघ जैसे विषय पर मेरे विचार यदि दूसरों को यकीन नहीं दिला सकेंगे, तो कम से कम उन्हें सोचने के लिए प्रेरित तो करेंगे ही।

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