2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 65

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

सम्राट अपने प्राधिकार कहां से प्राप्त करता है?

इस प्रकार का प्रश्न कनाडा तथा आस्ट्रेलिया के संबंध में अनावश्यक है, क्योंकि सम्राट ही सभी प्राधिकार का अंतिम स्रोत है और उसके आगे या पीछे कोई भी ऐसी शक्ति नहीं है, जिसके प्रति उसका प्राधिकार उत्तरदायी हो। क्या ऐसा भारतीय संघ के बारे में कहा जा सकता है? इस प्रश्न का उत्तर यह है कि संघ के प्राधिकार के एक भाग के लिए सम्राट अंतिम स्रोत है और शेष भाग के लिए सम्राट अंतिम स्रोत नहीं है।

यह वास्तविक स्थिति है, जैसा कि विलय के कानूनी दस्तावेजों की शर्तों से स्पष्ट होता है। मैं मसौदा - प्रपत्र से निम्नलिखित उदाहरण प्रस्तुत करता हूं :

जब कि ऐसे देशी राज्यों से, जो संघ में सम्मिलित हो सकते हैं और स्वशासी प्रांतों

के रूप में गठित ब्रिटिश भारत के प्रांतों से बनाए जाने वाले भारतीय संघ की स्थापना

के प्रस्तावों पर यूनाइटेड किंगडम की संसद के महामहिम की सरकार, ब्रिटिश भारत

तथा देशी राज्यों के शासकों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा हो चुकी है।

और जब कि इन प्रस्तावों पर विचार करने के बाद पाया गया कि भारतीय संघ

यूनाइटेड किंगडम की संसद के अधिनियम तथा देशी राज्यों के विलय द्वारा गठित

किया जाना चाहिए।

और यह कि भारतीय संघ के गठन के उपबंध का प्रावधान भारत सरकार अधिनियम,

1935 में किया गया है।

और यह कि अधिनियम यह प्रावधान करता है कि यह संघ उस तारीख तक

स्थापित नहीं किया जाएगा, जिस तारीख तक महामहिम उद्घोषणा द्वारा यह घोषित

नहीं कर देते और ऐसी घोषणा तब तक नहीं की जा सकती, जब तक कि देशी

राज्यों की पर्याप्त संख्या इस संघ में सम्मिलित नहीं की जाती।

और यह कि कथित अधिनियम मेरे किसी राज्य - क्षेत्र पर तब तक लागू नहीं हो

सकता, जब तक कि मेरी सहमति तथा अनुमति नहीं दी गई हो और जिसे संघ

के प्रति मेरे प्रपत्र द्वारा स्वीकृति प्रदान नहीं की गई हो।

अतः अब मैं (पूरा नाम तथा पदवी लिखें), शासक (राज्य का नाम लिखें), गवर्नर के प्रांत कहे जाने वाले प्रांतों तथा मुख्य कमिश्नर के प्रांत कहे जाने वाले प्रांतों तथा अन्य देशी राज्यों के शासकों सहित भारतीय संघ के नाम से सम्राट के अधीन संघ में संगठित होते हुए भारत के हितों तथा कल्याण की वृद्धि करने के लिए सहयोग के उद्देश्य से गठित राज्य की अपनी प्रभुसत्ता का उपयोग करते हुए एतद्द्वारा अपने विलय - पत्र पर हस्ताक्षर करता हूं और एतद्द्वारा घोषणा करता हूं कि महामहिम द्वारा इस विलय पत्र के स्वीकार कर लेने पर भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अंतर्गत स्थापित भारतीय संघ में सम्मिलित होता हूं।