संघ बनाम स्वतंत्रता
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भारतीय संघ की यह बहुत ही बड़ी विशेषता है। भारतीय संघ तथा कनाडा व आस्ट्रेलिया के संघों में क्या अंतर है? किस मामले में राज्य अंतिम स्रोत होता है और किस मामले में नहीं? इन प्रश्नों को समझने के लिए आपको दो बातें ध्यान में रखनी होगी। पहली, भारतीय संघ दो विशिष्ट क्षेत्रों से बना हैः ब्रिटिश भारत तथा देशी राज्य। यदि आप धारा 5 को देखें तो यह स्पष्ट हो जाएगा। दूसरी, सम्राट के साथ इन दोनों क्षेत्रों के संबंध समान नहीं हैं। ब्रिटिश भारत के नाम से जाना जाने वाला क्षेत्र सम्राट के अधीन है, जब कि देशी राज्य - क्षेत्र सम्राट के अधीन न होकर, शासक के अधीन हैं। यदि आप धारा 2 तथा 311 देखें तो यह स्पष्ट हो जाएगा। ब्रिटिश भारत का प्रांत - क्षेत्र सम्राट के अधीन होने के कारण इसकी प्रभुसत्ता सम्राट के पास है और देशी राज्य - क्षेत्र शासक के अधीन होने के कारण राज्य की प्रभुसत्ता राज्य के शासक के पास है।
अब आप समझ जाएंगे कि मैंने यह क्यों कहा है कि भारतीय संघ में शासक इसके प्राधिकार के एक भाग के लिए अंतिम स्रोत होता है तथा जहां तक ब्रिटिश भारत इस संघ का अंग है, शेष भाग के लिए सम्राट भारतीय संघ के प्राधिकार का अंतिम स्रोत होता है। भारतीय शासक प्राधिकार का अंतिम स्रोत केवल वहां तक है, जहां तक उसका राज्य इस संघ का अंग है। अतः जब धारा 7 यह कहती है कि संघ के कार्यकारी प्राधिकार का उपयोग सम्राट की ओर से गवर्नर - जनरल द्वारा किया जाएगा, इस मामले में यह समझ लेना चाहिए कि भारतीय संघ को मजबूत बनाने के लिए गवर्नर - जनरल को सम्राट द्वारा प्रत्यायोजित किए जाने वाला प्राधिकार आंशिक रूप से स्वयं उसका और आंशिक रूप से देशी राज्यों के शासकों से प्राप्त किया जाता है।
वह कौन - सी प्रक्रिया है जिसके द्वारा सम्राट उस प्राधिकार को प्राप्त करता है, जो प्राधिकार देशी राज्य के शासक का है? भारतीय अधिनियम के अंतर्गत इस प्रक्रिया को विलय के रूप में जाना जाता है। विलय - पत्र के माध्यम से विलय लागू किया जाता है, जो राज्य के शासक द्वारा हस्ताक्षरित होता है। विलय - पत्र से संबंधित उपबंध धारा 6(1) में दिए गए हैं। यह धारा इस प्रकार हैं :
- किसी राज्य को संघ में शामिल किया हुआ तभी माना जाएगा, जब महामहिम, शासक द्वारा स्वयं, अपने वारिसों तथा उत्तराधिकारियों के लिए हस्ताक्षरित विलय - पत्र पर अपनी स्वीकृति की मुहर लगा कर -
(क) घोषणा करता है कि वह इस उद्देश्य के साथ इस अधिनियम के अंतर्गत
स्थापित संघ में शामिल होता है कि महामहिम सम्राट, भारत के गवर्नर -
जनरल, संघीय विधान - मंडल, संघीय न्यायालय तथा संघ के उद्देश्यों के लिए
स्थापित कोई अन्य संघीय प्राधिकरण अपने विलय - पत्र के अनुसार हमेशा
उसकी शर्तों के अंतर्गत तथा केवल संघ के उद्देश्यों के लिए अपने राज्य से
संबंधित ऐसे कार्यों को करेगा, जो इस अधिनियम द्वारा अथवा इस अधिनियम
के अंतर्गत उसे सौंपे जाते हैं, तथा