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संघ की संरचना
संघीय विधान - मंडल द्विसदनीय विधान - मंडल है। इसके अंतर्गत एक निम्न सदन है,
जिसे विधान सभा कहा जाता है तथा एक उच्च सदन है, जिसे राज्य परिषद कहा जाता
है। इन दोनों सदनों का गठन उल्लेखनीय है। जनसंख्या तथा क्षेत्र की दृष्टि से बहुत
ही कम सदन ऐसे हैं, जिनकी अन्य विधान - मण्डलों से तुलना की जा सकती है, क्योंकि
संघीय सभा की कुल सदस्यता 375 तथा राज्य परिषद की सदस्य संख्या 260 है। ये
सीटें ब्रिटिश भारत तथा देशी राज्यों के बीच एक निश्चित अनुपात में विभाजित हैं। संघीय
सभा की 375 सीटों में से 250 सीटें ब्रिटिश भारत के हिस्से में हैं तथा 125 सीटें देशी
राज्यों के हिस्से में हैं। राज्य परिषद की 260 सीटों में से 156 सीटें ब्रिटिश भारत की हैं
तथा 104 सीटें देशी राज्यों की हैं। यह देखा जा सकता है कि ब्रिटिश भारत तथा देशी
राज्यों के बीच का बंटवारा समता सिद्धांत पर आधारित नहीं है। जनसंख्या को प्रतिनिधित्व
का आधार माना जा सकता है। राजस्व को भी प्रतिनिधित्व का आधार बनाया जा सकता
है। लेकिन इन दोनों में से किसी को भी सीटों के बंटवारे का आधार नहीं माना गया है।
चाहे आप जनसंख्या को आधार मानें या राजस्व को, आप देखेंगे कि दोनों ही सदनों में
ब्रिटिश भारत को कम तथा देशी राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है। सीटों को भरने
की विधि भी उल्लेखनीय है। ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधि दोनों ही सदनों में चुने जाएंगे।
दूसरी ओर देशी राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यों के शासकों द्वारा नियुक्त, अर्थात् नामित
किया जाना है। शासक इस बात के लिए स्वतंत्र है कि उसके द्वारा नियुक्त उसके राज्यों
के प्रतिनिधियों को उसकी प्रजा द्वारा चुना जा सकता है, लेकिन यह मामला ऐसा है, जो
उसके स्वविवेक पर निर्भर करता है। वह अपनी प्रजा द्वारा चुने गए व्यक्ति को नियुक्त
कर सकता है या यदि वह चाहे तो दोनों ही कार्य कर सकता है, अर्थात् वह नियुक्त
भी कर सकता है और चुन भी सकता है। अंत में राज्य के प्रतिनिधि को शासक द्वारा
नियुक्त किया जाता है। ब्रिटिश भारत के मामले में प्रतिनिधि चुने जाते हैं, लेकिन यहां
एक विशेष बात उल्लेखनीय है। सभी द्विसदनीय विधान - मंडलों के मामले में निचले सदन
के लोकप्रिय सदन होने के कारण इसके प्रतिनिधियों को हमेशा ही जनता द्वारा प्रत्यक्ष
मतदान से चुना जाता है, जबकि ऊपरी सदन के पुनरीक्षण सदन होने के कारण इसके
प्रतिनिधियों को अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुना जाता है। भारतीय संघ के मामले में यह
प्रक्रिया विपरीत है। ऊपरी सदन को जनता प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुनेगी तथा निचले