2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 69

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

सदन को प्रांतीय विधान - मंडलों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाएगा। संघीय विधान सभा का कार्यकाल पांच वर्षों की अवधि तक के लिए निश्चित हैं, हालांकि इसे उससे पहले भी भंग किया जा सकता है। दूसरी तरफ राज्य परिषद एक स्थायी निकाय है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता। यह एक ऐसा निकाय है, जिसके एक तिहाई सदस्य प्रत्येक तीन वर्ष के बाद क्रमिक रूप से बदलते रहते हैं।

अब कानून पारित करने तथा व्यय की स्वीकृति देने संबंधी इन दोनों सदनों के प्राधिकारों को देखिए। जहां तक कानून पास करने के प्राधिकार का सवाल है, कुछ संविधान धन - विधेयक तथा अन्य विधेयकों में अंतर करते हैं और उनमें यह प्रावधान है कि ऊपरी सदन को धन - विधेयक प्रस्ताव लाने का कोई अधिकार नहीं होगा और यह भी कि ऊपरी सदन को ऐसे विधेयक को निरस्त करने का भी अधिकार नहीं होगा। इसको केवल इतना अधिकार है कि वह कुछ निश्चित समय के लिए इस विधेयक का पारित करना स्थगित कर सकता है। धन - विधेयक तथा अन्य विधेयक एक जैसे ही माने जाते हैं तथा उनके कानून बनने से पहले उनको दोनों की स्वीकृति मिलना आवश्यक होता है। इनमें अंतर केवल इतना है कि धारा 30 (1) के अनुसार यदि कोई विधेयक धन - विधेयक नहीं है तो वह किसी भी सदन में लाया जा सकता है, लेकिन धारा 37 के अनुसार धन - विधेयक ऊपरी सदन में नहीं लाया जा सकता है। लेकिन धारा 3(2) के अनुसार धन - विधेयक को अन्य किसी विधेयक की तरह ही ऊपरी सदन की स्वीकृति मिलना आवश्यक होता है।

व्यय स्वीकृति का प्राधिकार : जब विधान-मंडल द्विसदनीय होता है, तब एक बार फिर इन दोनों सदनों के बीच प्राधिकार के बंटवारे के स्वीकृत सिद्धांतों में भिन्नता पाई जाती है।

धारा 31(1) के अनुसार प्राप्तियों तथा व्यय का वार्षिक वित्तीय विवरण संघीय विधान - मंडल के दोनों सदनों के सामने रखा जाएगा और इस पर दोनों ही सदनों में बहस की जा सकेगी। न केवल इस मामले में दोनों सदनों में बहस की जा सकती है, बल्कि इन पर दोनों सदनों में मतदान भी किया जा सकता है। धारा 34(2) के अनुसार व्यय को अनुदानों के लिए मांग के रूप में संघीय विधान सभा के सामने रखा जाएगा और उसके पश्चात् राज्य परिषद में रखा जाएगा तथा किसी भी सदन को यह अधिकार प्राप्त होगा कि वह किसी भी मांग को स्वीकृत या अस्वीकृत करे या उसमें उल्लिखित राशि में कमी करते हुए किसी भी मांग को स्वीकृति प्रदान करे।

अतः यह स्पष्ट है कि ये दोनों सदन प्राधिकारों के मामले में समान हैं और ये प्राधिकार कानून पारित करने तथा व्यय को स्वीकृति प्रदान करने, दोनों से संबंधित हैं। इन दोनों सदनों के बीच उत्पन्न हुए विवाद किसी एक सदन के दूसरे सदन के समक्ष झुकने से हल नहीं हो सकते, यदि वह सदन झुकने के लिए तैयार न हो। इन दोनों सदनों के बीच उत्पन्न हुए मतभेदों को हल करने के लिए संयुक्त अधिवेशन की कार्य - प्रक्रिया अपनाई गई है। धारा 31(3) में संयुक्त अधिवेशन की प्रक्रिया का उल्लेख है, जहां विधेयक के