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संघ बनाम स्वतंत्रता

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तथा संघीकृत राज्यों के बीच किसी कानून या तथ्य को लेकर झगड़े के रूप में उभरते हैं और जिन पर कानूनी अधिकार की विद्यमानता या विस्तार निर्भर करता है। हालांकि इस धारा में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई राज्य एक पक्ष है तो इस विवाद के संबंध में इस अधिनियम या उसके अधीन सभा के आदेश या विलय - पत्र के माध्यम से संघ में विहित वैधानिक या कार्यकारी प्राधिकार के निर्वचन का सहारा लिया जाना चाहिए, या विवाद राज्यों में संघीय कानून के प्रशासन हेतु इस अधिनियम के भाग 6 के अंतर्गत किसी करार के अंतर्गत हो या ऐसे मामले पर हो जिसके अंतर्गत संघीय विधान - मंडल को राज्यों के लिए कानून बनाने का अधिकार हो या राज्यों तथा संघ या प्रांत के बीच सम्राट के प्रतिनिधियों के अनुमोदन सहित संघ के बाद हुए करार के अंतर्गत विवाद होने की स्थिति में इस धारा में ऐसे क्षेत्राधिकार का भी प्रावधान है। राज्यों के संबंध में संघीय न्यायालय के इस सीमित अधिकार - क्षेत्र को इस शर्त द्वारा और भी सीमित कर दिया गया है कि यदि कोई विवाद ऐसे क्षेत्राधिकार के बाहर आने वाले करार के अंतर्गत पैदा होता है तो वह विवाद न्याय योग्य नहीं होगा।

संघीय ढांचे का अपील संबंधी क्षेत्राधिकार धारा 205 तथा धारा 207 द्वारा विनियमित होता है। धारा 205 कहती है कि ब्रिटिश भारत के किसी उच्च न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या अंतिम आदेश से संबंधित अपील संघीय न्यायालय में की जा सकेगी, बशर्तें उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दे कि मामला इस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई परिषद के आदेश के निर्वचन जैसे गंभीर कानूनी प्रश्न से संबंधित है। धारा 207 संघीकृत राज्यों के न्यायालयों के निर्णय के विरुद्ध अपील से संबंधित है। इसमें उल्लेख है कि किसी संघीकृत राज्य के न्यायालय से संघीय न्यायालय में अपील की जा सकेगी, यदि कानूनी प्रश्न पर गलत निर्णय दिया गया है, जो प्रश्न इस अधिनियम या उसके अधीन बनाई गई परिषद के किसी आदेश या वैधानिक अधिकारकरण या उस राज्य के विलय - पत्र द्व ारा संघ में विहित कार्यकारी प्राधिकार से संबंधित है या संघीय विधान - मंडल के कानून के उस राज्य में प्रशासन हेतु इस अधिनियम के भाग 6 के अंतर्गत किए गए करार के अंतर्गत पैदा होता है, लेकिन धारा 207 की उप-धारा (2) में प्रावधान है कि इस धारा के अंतर्गत कोई भी अपील उच्च न्यायालय द्वारा संघीय न्यायालय की राय जानने हेतु विशिष्ट मामले के रूप में भेजे जाने पर ही स्वीकार की जाएगी तथा संघीय न्यायालय भी किसी मामले में ऐसा उल्लेख करने के लिए कह सकता है।

संघीय न्यायालय के संबंध में दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली बात तो संघीय न्यायालय द्वारा अपने ही आदेशों को कार्यान्वित करने की शक्ति से संबंधित है। संघीय न्यायालय के पास अपने ही आदेशों को लागू करने के लिए मशीनरी नहीं है। धारा 210 में उल्लेख किया गया है कि संघीय न्यायालय के आदेश ब्रिटिश भारत या संघीकृत राज्य के सभी न्यायालयों तथा प्राधिकारियों द्वारा ऐसे लागू किए जाएंगे मानों उन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नागरिक तथा आपराधिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए बनाया गया हो। अतः अपने ही आदेशों को लागू करने के लिए जो व्यवस्था संघीय न्यायालय के पास