56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
है, वह केवल संघ की इकाइयों की प्रशासनिक मशीनरी ही है। संघीय इकाइयां संघीय न्यायालय की सहायता करने के लिए बाध्य होती हैं। उदाहरण के तौर पर यह प्रणाली संयुक्त राज्य अमरीका में प्रचलित प्रणाली से भिन्न है, क्योंकि वहां उच्चतम न्यायालय के पास अपने आदेशों को लागू करने या कराने की अपनी व्यवस्था है।
संघीय न्यायालय के बारे में दूसरी उल्लेखनीय बात न्यायाधीशों को हटाने की कार्यपालिका की शक्तियों और उनके आचरण पर चर्चा करने संबंधी विधान-मंडल की शक्ति से संबंधित प्रश्न है। इस संबंध में भी संघीय न्यायालय अन्य संघों के संघीय न्यायालयों से भिन्न है। संविधान संघीय न्यायालय के किसी न्यायाधीश को निलंबित करने की शक्ति गवर्नर - जनरल को नहीं देता। यह विधान-मंडल को भी किसी न्यायाधीश के न्यायिक आचरण के बारे में चर्चा करने की अनुमति नहीं देता। निस्संदेह, इससे संघीय न्यायालय के न्यायाधीश को अपनी पदावधि तक पद पर बने रहने की स्थिरता तथा कार्यपालिका या विधान-मंडल द्वारा हस्तक्षेप न किए जाने की स्वतंत्रता मिलती है। कार्यपालिका के नियंत्रण से न्यायपालिका को मुक्त करने के लिए यह आवश्यक हो गया है कि किसी न्यायाधीश की पदावधि कार्यपालिका की दया पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। अतः सभी संविधानों में यह प्रावधान है कि न्यायाधीश का पद पर बने रहना उसके सद्व्यवहार पर निर्भर करेगा तथा किसी न्यायाधीश को केवल तभी हटाया जा सकेगा, जबकि विधान-मंडल द्वारा ऐसी घोषणा करते हुए प्रस्ताव लाया जाए कि उसका व्यवहार ठीक नहीं है। ऐसा कुछ प्राधिकार किसी को दिया जाना चाहिए, जिसे किसी न्यायाधीश के सद्व्यवहार के बारे में घोषणा करने की शक्ति प्राप्त हो। संघीय संविधान में यह प्रावधान नहीं है, अतः संघीय न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में एक बार नियुक्ति हो जाने पर उसे उसकी सेवानिवृत्ति तक पद से नहीं हटाया जा सकता, भले ही इस अवधि के दौरान उसका व्यवहार कैसा भी रहा हो। इसके बजाय धारा 200(2)(ख) के अंतर्गत संघी न्यायालय के न्यायाधीश को उसके दुर्व्यवहार या शारीरिक अथवा मानसिक कमजोरी के आधार पर हटाए जाने की शक्ति महामहिम के पास है, बशर्ते कि प्रीवी काउंसिल की न्यायिक समिति इस आशय का प्रतिवेदन प्रस्तुत करे कि उसे ऐसे किसी कारण के आधार पर हटाया जाए।
4
संघ की शक्तियां
| l | a?k |
|---|
| fD | r | ; |
|---|
संघीय सरकार की शक्तियों का वर्णन करने से पहले सरकार के संघीय ढांचे के मूल तत्व की व्याख्या करना वांछनीय होगा। इसकी व्याख्या करने का सरलतम तरीका सरकार के एकात्मक ढांचे के साथ उसकी तुलना करना है।
यद्यपि सरकार का संघीय स्वरूप एकात्मक स्वरूप से भिन्न होता है, तथापि इन दोनों के बीच अंतर करना आसान नहीं है। दूसरी ओर, ऊपरी तौर पर इन दोनों के बीच