संघ बनाम स्वतंत्रता
57
बहुत अधिक समानता पाई जाती है। आजकल प्रत्येक देश की सरकार विशिष्ट क्षेत्रों में कार्यरत प्रशासनिक इकाइयों के अंतःसंबंधित समूहों द्वारा चलाई जाती है और विशिष्ट जनकार्य किए जाते हैं। यह सरकार के संघीय स्वरूप तथा सरकार के एकात्मक स्वरूप वाले देशों के बारे में भी सही है। संघीय संविधान में एक केन्द्र सरकार होती है और उससे संबद्ध कई स्थानीय सरकारें होती हैं। ठीक इसी तरह से एकात्मक संविधान में एक केन्द्रीय सरकार होती है और उससे जुड़ी हुई कई स्थानीय सरकारें होती हैं। इस प्रकार ऊपरी तौर पर इन दोनों के बीच कोई अंतर दिखाई नहीं पड़ता।
इन दोनों के बीच में वास्तविक अंतर होता है। यह स्पष्टतः दिखाई नहीं देता। यह अंतर केन्द्र तथा स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों के बीच अंतःसंबंध के रूप में होता है। इस अंतर का हम इस प्रकार उल्लेख कर सकते हैं : सरकार के एकात्मक ढांचे के अंतर्गत स्थानीय निकायों की शक्तियां केन्द्रीय सरकार के अधिनियम से प्राप्त होती हैं। ऐसा होने के कारण स्थानीय सरकार की शक्तियां को केन्द्रीय सरकार द्वारा कभी भी वापस लिया जा सकता है। सरकार के संघीय स्वरूप में केन्द्रीय सरकार तथा स्थानीय सरकारों की शक्तियां संविधान के कानून द्वारा प्राप्त होती हैं, जिन्हें न तो स्थानीय सरकार और न केन्द्रीय सरकार अपने अधिनियम के द्वारा बदल सकती हैं। इन दोनों को ही अपनी शक्तियां संविधान के कानून के तहत मिलती हैं और संविधान के अनुसार इसमें प्रत्येक से अपेक्षा की जाती है कि वे खुद को दी गई शक्तियों के अंतर्गत ही समिति रखें। संविधान न केवल प्रत्येक की शक्तियों का निर्धारण करता है, बल्कि एक ऐसी न्यायपालिनका की भी व्यवस्था करता है जो किसी अधिनियम के बारे में यह घोषणा कर सके, चाहे वह स्थानीय सरकार का हो या केन्द्रीय सरकार का, कि वह निरस्त कर दिया गया है, यदि ऐसा अधिनियम संविधान द्वारा निर्धारित सीमा का उल्लंघन करता हो। इसके बारे में क्लीमेंट ने कनाडा के संविधान पर अपनी पुस्तक में लिखा है :
ब्यौरे के अतिरिक्त, आज के युग में संघीय सरकार शब्द में एक ऐसा करार विहित
है, जो लोगों को ऐसे मामलों में एक ही सामान्य सरकार के नियंत्रण के प्रति
प्रतिबद्ध करता है, जिनके बारे में सामान्य हितों के कारण सहमति हुई है, फिर भी
प्रत्येक स्थानीय सरकार को अन्य सभी मामलों में स्वतंत्र तथा स्वायत्त छोड़ दिया
गया है। एक आवश्यक उप - सिद्धांत के रूप में संपूर्ण करार में मूल कानून विहित
होता है, जिसे न्यायालयों में मान्यता प्रदान की जाती है और जिसे न्यायालयों के
अभिकरण के माध्यम से ही लागू किया जाता है। वस्तुस्थिति की वह रेखा जो
संपूर्ण संघ से संबंधित सामान्य हितों के मामलों में प्रत्येक इकाई के स्थानीय हितों
के मामलों से पृथक करती है, संघ का मूल तत्व नहीं है। जब कि इसे किसी
भी प्रस्तावित योजना के अंतर्गत लिया जाता है तो यह संघ में शामिल होने वाले
समुदायों द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि उनकी वास्तविक
परिस्थितियों, भौगोलिक, वाणिज्यिक, जातीय या अन्य के संबंध में वास्तव में समान
हितों के मामले क्या - क्या हैं, जिन्हें सामान्य सरकार को सौंपा जाना है। लेकिन