58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
संघ में शामिल होने वाले करार द्वारा निर्धारित इस रेखा का अनुरक्षण आधुनिक
संघ का मूल तत्व है, कम से कम उस प्रकार का, जैसा कि आज तीन महान
आंग्ल सैक्सन संघों - संयुक्त राज्य अमेरीका, आस्ट्रेलिया तथा कनाडा में दर्शाया
गया है। इस प्रकार मूलभूत प्रपत्र जिसमें कि देश का मौलिक कानून विहित होता
है, उसकी व्याख्या के लिए न्यायालयों को ही संवैधानिक व्याख्या करने की महत्ता
तथा गुरुता प्रदान की गई है।
इस प्रकार संविधान के कानून द्वारा केन्द्र तथा स्थानीय सरकारों के बीच सरकार की शक्तियों को विभाजित करने तथा उन्हें बनाए रखने के उद्देश्य से न्यायापालिका के माध्यम से खींची जाने वाली रेखा सरकार के संघीय स्वरूप की दो विशिष्ट विशेषताएं प्रकट करती है। यही दो विशेषताएं उसे सरकार के एकात्मक स्वरूप से पृथक करती हैं। संक्षेप में, प्रत्येक संघ में दो बातें सम्मिलित होती हैं : (1) केन्द्रीय सरकार तथा इकाइयां, जो इसे संविधान के कानून के अनुसार बनाती हैं, के बीच शक्तियों का विभाजन, जो दोनों की इन शक्तियों से परे होता है कि दी हुई शक्तियों में कोई परिवर्तन कर सकें या उनके कार्य को सीमित कर सकें, और (2) दोनों के नियंत्रण से परे एक न्यायाधिकरण होता है और वह तभी निर्णय देता है, जब ऐसा कोई प्रश्न उत्पन्न होता है कि केन्द्र या एक इकाई, विधान-मंडल, न्यायापालिका, प्रशासन या वित्तीय विभाग का कोई विशिष्ट अधिनियम संविधान द्वारा दी गई शक्तियों से परे हो।
संघ सरकार का तात्पर्य स्पष्ट कर देने के बाद मैं आपको उन शक्तियों के बारे में कुछ जानकारी देना चाहूंगा, जो संविधान द्वारा संघीय सरकार को प्रदान की जाती हैं।
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संघ की विधायी शक्तियां
विधायी शक्तियों के विभाजन के उद्देश्य से विधान के संभाव्य विषयों को तीन श्रेणियों में रखा गया है। पहली श्रेणी के अंतर्गत के विषय आते हैं, जिनके बारे में नियम बनाने का पूरा - पूरा अधिकार संघीय विधान-मंडल के पास होता है। इस सूची को संघीय सूची कहा जाता है। दूसरी श्रेणी के अंतर्गत वे विषय आते हैं, जिनके बारे में नियम बनाने का पूरा - पूरा अधिकार प्रांतीय विधान-मंडल के पास होता है। इस सूची को प्रांतीय सूची कहा जा जाता है। तीसरी श्रेणी में वे विषय आते हैं, जिनके बारे में नियम बनाने का अधिकार संघ या प्रांत, दोनों ही विधान-मंडलों को होता है। इस सूची को समवर्ती सूची कहा जाता है। इन सूचियों का कार्य - क्षेत्र तथा विषय वस्तु भारत सरकार अधिनियम की अनुसूची 7 में दी गई है।
संघ के मूल सिद्धांतों के अनुसार संघीय विधान-मंडल द्वारा बनाया गया नियम (कानून) यदि प्रांतीय सूची में दिए गए मामले से संबंधित है तो यह नियम - विरुद्ध होगा