64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
इसे मान्यता नहीं मिली और जिसके कारण 1861 का गृह - युद्ध हुआ। इस गृह-युद्ध से दो महत्वपूर्ण सिद्धांत तय हुएः (1) किसी भी राज्य संघीय सरकार के किसी भी अधिनियम को अवैध घोषित करने का अधिकार नहीं है, और (2) किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। भारतीय संघ से अलग होने के अधिकार के लिए युद्ध करना अनावश्यक होगा, क्योंकि संविधान में इस बात को मान्यता प्रदान की गई है कि भारतीय संघ से देशी राज्यों को अलग होने का अधिकार है, बशर्तें कुछ विशिष्ट परिस्थितियां घटित हों। चिरस्थायी संघ क्या है तथा गठबंधन क्या है, इसके बारे में इंग्लैड तथा स्कॉटलैंड के बीच संघ की प्रकृति के अपने विश्लेषण में ब्लैकस्टोन ने स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है। उनकी ही भाषा का उपयोग करें तो भारतीय संघ कोई नियमित संघ नहीं है, क्योंकि किसी संघ में संविदाकारी दो राज्य अपना अस्तित्व खो देते हैं। उनमें पुनर्जीवन की शक्ति नहीं रहती। भारतीय संघ दो संविदाकारी राज्यों का गठबंधन है, सम्राट तथा देशी राज्यों का, जिसके अंतर्गत इनमें से कोई भी पूरी तरह नष्ट नहीं होता, बल्कि प्रत्येक के पास यह अधिकार सुरक्षित होता है कि शर्त टूट जाने पर वह अपनी मूल - स्थिति प्राप्त कर सकता है। संयुक्त राज्य का संविधान गठबंधन के तौर पर उभरा था, लेकिन वह संघ में बदल गया। भारतीय संघ गठबंधन के रूप में उभरा था और गठबंधन के रूप में ही जारी रहेगा। यह निर्विवाद है कि भारतीय संघ में संघ का कोई लक्षण नहीं है, लेकिन दूसरी ओर इसमें गठबंधन के सभी संकेत मौजूद हैं। अमरीकी संविधान पर अपने भाषण में डैनियल वेबस्टर ने संघ के लक्ष्यों के बारे में कहा था :
... यह संविधान उस राजनीतिक प्रणाली की बात करता है, जिसे संयुक्त राज्य की
सरकार के रूप में स्थापित किया गया है। क्या प्रभुतासंपन्न शक्तियों के बीच हुए
मेल या गठबंधन को ‘सरकार’ कहना भाषा का हनन नहीं होगा? किसी राज्य की
सरकार वह संगठन होता है, जिसमें राजनीतिक शक्ति विहित होती है।
... किसी सरकार तथा किसी लीग या गठबंधन के बीच मोटे तौर पर स्पष्ट अंतर
यह है कि सरकार एक राजनीतिक निकाय होती है, इसकी अपनी इच्छाशक्ति होती
है तथा इसके पास अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए शक्तियां तथा वैधानिक
स्वतंत्रता होती है। प्रत्येक गठबंधन अपने अनुबंधों को लागू करने के लिए कुछ
शक्ति चाहता है। प्रभुतासंपन्न राज्यों के बीच हुए गठबंधन में भी अपने कार्यपालन को
सुनिश्चित करने के लिए शक्ति की आवश्यकता पड़ती है, हालांकि ऐसे मामले में यह
शक्ति एक पक्ष के बल का दूसरे पक्ष के बल के खिलाफ उपयोगमय होती है, अर्थात्
इसे युद्ध - शक्ति कहा जा सकता है। लेकिन सरकार अपने निर्णय का पालन अपने
सर्वोच्च प्राधिकार के साथ करती है। सरकार द्वारा अपने ही अधिनियमों का पालन
कराने के लिए उपयोग में लाया गया बल युद्ध नहीं होता। यह विचार करती है कि
किसी भी विपक्षी दल के पास विरोध करने का अधिकार न हो, यह उसकी अपनी
इच्छा को लागू करने की शक्ति में विहित होता है, और जब उसके पास यह शक्ति
नहीं रह जाती है, तब वह सरकार भी नहीं रहती।