68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
इस धारा में किसी बात के होते हुए भी किसी संघीकृत राज्य के शासक का कार्यकारी
प्राधिकार उस राज्य में उन मामलों के योग्य होगा, जिनके संबंध में उस राज्य के
लिए संघीय विधान-मंडल को कानून बनाने का प्राधिकार प्राप्त है, केवल ऐसे मामलों
के अलावा जहां संघ का कार्यकारी प्राधिकार संघीय कानून के अनुसार शासक के
कार्यकारी प्राधिकार को छोड़कर उस राज्य में लागू होता है।
सीधे शब्दों में इस उप-धारा का क्या मतलब है? वह यह है कि किसी प्रांत के संबंध में संघ का कार्यकारी प्राधिकार उन सभी मामलों पर लागू होता है, जिन पर संघ को विधायी प्राधिकार प्राप्त होता है। राज्य के मामले में स्थिति बिल्कुल भिन्न है। मात्र यह तथ्य कि संघीय विधान-मंडल को किसी राज्य के मामले में कानून बनाने का प्राधिकार प्राप्त होता है, संघ को उस विषय के संबंध में उस राज्य के ऊपर कोई भी कार्यकारी प्राधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। ऐसा कार्यकारी प्राधिकार संघ द्वारा पारित कानून के परिणामस्वरूप ही दिया जा सकता है। क्या इस तरह का कानून पास किया जा सकता है? यह राज्यों के संघीय विधान-मंडल में विशाल प्रतिनिधित्व को देखते हुए समस्या - मूलक है। परिणाम चाहे कुछ भी हो, सिद्धांत रूप में संघ का कार्यकारी प्राधिकारी संघीकृत राज्य पर लागू नहीं होता। स्थिति यह है कि प्रांतों के मामलों में जहां संघ कानून बना सकता है और उनका पालन करा सकता है, वहीं संघीकृत राज्यों के मामलों में संघ कानून तो बना सकता है, लेकिन उनका पालन नहीं कर सकता। उनके पालन का अधिकार राज्य के पास होता है।
प्रशासन के संबंध में
जब आप प्रशासन के दृष्टिकोण से संविधान की जांच करेंगे तो पाएंगे कि उस अधिनियम की कुछ धाराएं संघीय सरकार, प्रांतीय सरकारों तथा राज्य सरकारों के मार्गदर्शन हेतु कुछ नियमों का निर्धारण करती हैं। इन धाराओं का उद्देश्य उन्हें यह बताना होता है कि वे अपने संविधान कार्यकारी प्राधिकार का उपयोग कैसे करें। ये धाराएं हैं, 122, 126 तथा 128.
धारा 122 संघीय सरकार से संबंधित है। इसके अनुसार :
(1) प्रत्येक प्रांत तथा संघीकृत राज्य के कर्यकारी प्राधिकार को इस तरह से उपयोग
में लाया जाएगा, जिसके अनुसार संघीय विधान-मंडल के उन कानूनों को सुरक्षा
प्रदान की जा सके, जो उस प्रांत या राज्य में लागू होते हैं।
(2) किसी भी प्रांत से संबंधित संघीय विधान-मंडल के कानूनों के लिए इस धारा की
उपधारा (1) में दिए गए संदर्भ में किसी भी वर्तमान भारतीय कानून का संदर्भ
सम्मिलित है, जो उस प्रांत में लागू होता है।
(3) इस अधिनियम के किसी भी भाग के किसी भी अन्य उपबंधों के प्रति बिना किसी
पूर्वग्रह के किसी भी प्रांत या संघीकृत राज्य में संघ के कार्यकारी प्राधिकार के
उपयोग में उस प्रांत या राज्य के हित शामिल होंगे।