संघ बनाम स्वतंत्रता
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धारा 126 प्रांतीय सरकारों के प्रति समर्पित है। इसमें व्यवस्था है :
126(1) प्रत्येक प्रांत के कार्यकारी प्राधिकार का इस तरह से इस्तेमाल किया जाएगा,
जिससे कि संघ के कार्यकारी प्राधिकारी के उपयोग में कोई बाधा उत्पन्न न हो या
पूर्वग्रह न हो और संघ का कार्यकारी प्राधिकार प्रांत को ऐसे निर्देश दे सके, जो संघीय
सरकार को इस उद्देश्य हेतु आवश्यक प्रतीत हों।
धारा 128 राज्यों से संबंधित है। यह इस प्रकार है :
(1) प्रत्येक संघीकृत राज्य का कार्यकारी प्राधिकार इस प्रकार प्रयुक्त होगा, जो संघ
के कार्यकारी प्राधिकार के प्रयोग में बाधक या प्रतिकूल न हो, जहां तक कि
संघीय विधान-मंडल के विधि महत्व के कारण यह राज्य में प्रयोक्तव्य, जो वहां
लागू होता है।
(2) यदि गवर्नर - जनरल को ऐसा आभास होता है कि किसी संघीकृत राज्य का
शासक पूर्ववर्ती उप-धारा के अंतर्गत अपने कर्त्तव्यपालन में असफल रहा है तो
गवर्नर - जनरल स्वविवेक से कार्य करते हुए शासक द्वारा उसको प्रदत्त किसी
भी अभ्यावेदन पर विचार करने के उपरांत शासक को कोई भी निर्देश दे सकता
है, जिन्हें वह उचित समझता है। यदि इस धारा के अंतर्गत कोई प्रश्न उठता है
कि क्या संघ का कार्यकारी प्राधिकार राज्य में प्रयोक्तव्य है, जिस संबंध में यह
प्रयोक्तव्य है, यह प्रश्न संघ अथवा शासक के अनुरोध पर उस अधनियम के
अंतर्गत संघीय न्यायालय को उस न्यायालय द्वारा विवाद के निपटान हेतु भेजा
जाएगा, जिसके मूल क्षेत्राधिकार में यह आता है।
अगर इन अभिकरणों द्वारा कार्यकारी प्राधिकार के प्रयोग में किसी संघर्ष की संभावना होती तो ये सब धाराएं बहुत उपयोगी सिद्ध होतीं। लेकिन ये सब बिल्कुल अनावश्यक होंगी, क्योंकि वास्तव में कार्यकारी प्राधिकारका कोई विरोध नहीं होगा। यह तभी होगा, जब प्रशासकीय कार्य कार्यकारी प्राधिकार का अनुगमन करता है। जब प्रशासन कार्यकारी प्राधिकार से पृथक कर दिया जाता है तो किसी संघर्ष की संभावना नहीं रहती और इन धाराओं में समाहित प्रबोधन बिल्कुल अनावश्यक है।
अब यह संभव है कि संघीय संविधान में संघीय सरकार को शासन की शक्तियों से बिल्कुल वंचित कर दिया जाए और यह एक प्राधिकार विहीन ढांचा मात्र रह जाए। संविधान में यह व्यवस्था है कि संघीय विधान-मंडल का गवर्नर - जनरल इसके द्वारा पारित किसी कानून के क्रियान्वयन को संघीय कार्यपालिका के स्थान पर इकाइयों के, यानि प्रांतीय सरकारों और देशी राज्यों के, सुपुर्द कर सकता है। धारा 124 की शर्तों के अनुसार यह स्पष्ट है :
(1) इस अधिनियम के बावजूद गवर्नर - जनरल एक प्रांतीय सरकार या संघीकृत
राज्य के शासक की सहमति से या तो सशर्त सरकार अथवा शासक, अथवा उनके
संबंधित अधिकारियों को किसी भी मामले से संबंधित ऐसे कार्य सौंप सकता है,
जिन पर संघ का कार्यकारी प्राधिकार कायम है।