2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 87

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(2) संघीय विधान-मंडल का एक अधिनियम, यद्यपि इसका संबंध उस विषय से है,

जिस पर प्रांतीय विधान-मंडल को कानून बनाने का अधिकार नहीं है, एक प्रांत,

अथवा अधिकारियों और उनके प्राधिकारियों को शक्तियां प्रदान कर सकता है

और कर्त्तव्य सौंप सकता है।

(3) संघीय विधान-मंडल का एक अधिनियम जो संघीकृत राज्य पर लागू होता है,

राज्य अथवा अधिकारियों और प्राधिकारियों को शक्तियां प्रदान कर सकता है और

उनको कर्त्तव्य सौंप सकता है, जिन्हें इस उद्देश्य हेतु शासक ने नामित किया है।

(4) जहां इस धारा के अंतर्गत किसी प्रांत या संघीकृत राज्य या उनके अधिकारियों

या प्राधिकारियों को शक्तियां और कर्त्तव्य सौंपे गए हैं, वहां उस प्रांत या राज्य को

संघ द्वारा उतनी राशि का भुगतान किया जाएगा, जिस पर करार हुआ है और

उस करार की अवहेलना करने पर उन शक्तियों तथा कर्त्तव्यों के अनुपालन के

संबंध में उस प्रांत या राज्य द्वारा किए गए अतिरिक्त प्रशासनिक खर्च के संबंध

में भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा निर्धारित राशि अदा की

जाएगी।

यह भी संभव है कि राज्य और प्रांत मिलकर संघ को उसकी सभी प्रशासनिक शक्तियों से वंचित कर दें और उसे केवल कानून बनाने वाली संस्था बना दें। तथापि धारा 125 से एक और डांवाडोल परिस्थिति उत्पन्न होती है। वह इस प्रकार है :

(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यदि राज्य के विलय - पत्र में करार

संबंधी उपबंध दिए गए हैं तो गवर्नर - जनरल और संघीकृत राज्य के शासक के

बीच राज्य पर लागू होने वाली संघीय विधान-मंडल के किसी कानून का उसके

राज्य में अनुपालन किए जाने हेतु उस शासक या उसके अधिकारियों द्वारा किए

जाने वाले प्रयोग के संबंध में सहमति हो सकती है।

(2) इस धारा के अंतर्गत हुई सहमति के अनुसार गवर्नर - जनरल निरीक्षण या अन्य

किसी तरीके द्वारा स्वविवेक से अपने को संतुष्ट कर सकेगा कि क्या उनका

प्रशासन जिसके संबंध में यह करार किया गया है, संघीय सरकार की नीति के

अनुसार चल रहा है और यदि गवर्नर - जनरल संतुष्ट नहीं होता है तो वह अपने

विवेकानुसार उस शासक को ऐसे निर्देश जारी कर सकता है, जिन्हें वह ठीक

समझता है।

(3) सभी न्यायालय इस धारा के अंतर्गत किए गए किसी भी करार का न्ययिक पालन

करेंगे।

इस धारा का अर्थ यह है कि एक राज्य अपने विलय - पत्र के अनुसार राज्य में संघीय कानूनों का संघ की बजाए राज्य अभिकरण द्वारा क्रियान्वित करने की शर्त लगा सकता है और अगर वह ऐसी शर्त लगाता है, तब राज्य के मामले में संघ की कोई प्रशासकीय शक्ति नहीं रह जाएगी। कानून का लाभ उसके प्रशासन पर निर्भर करता है। जहां प्रशासन अक्षम