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संघ बनाम स्वतंत्रता

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3, और 4 के अंतर्गत लगाए जाते हैं, उन करों के लिए देनदार नहीं हैं और जहां तक वे असाधारण राजस्व के स्रोत के शीर्षक के अंतर्गत अंशदान के लिए देनदार भी हैं, वहां यह प्रमाणित किया जाना चाहिए कि सभी प्रकार की अन्य मितव्ययिता बरती गई है।

वित्तीय दृष्टि से राज्यों और प्रांतों में एक और भेद भी है। अधिनियम में प्रांतीय सरकारों के लिए कराधान का क्षेत्र परिभाषित कर दिया गया है। एक प्रांतीय सरकार अधिनियम में वर्णित स्रोत के अलावा अन्य किसी स्रोत से राजस्व प्राप्त नहीं कर सकती। राज्यों के बारे में यह बात लागू नहीं होती। भारत सरकार अधिनियम में ऐसी कोई बात नहीं है, जो संघीकृत राज्य की कराधान प्रणाली से संबंधित शक्तियों को परिभाषत करती हो। आंतरिक प्रशासन के लिए राजस्व प्राप्ति हेतु यह किसी भी प्रकार का कराधान कर सकती है और पड़ोसी प्रांत के क्षेत्र से अपने यहां अपने वाले सामान पर सीमा शुल्क भी लगा सकती है, यद्यपि वह सीमावर्ती प्रांत संघीय सरकार की ही एक इकाई है जिसका कि संघीकृत राज्य भी एक इकाई है। भारतीय संघ का यह एक अत्यंत असाधारण लक्षण है, साथ ही यह अत्यंत बुरे लक्षणों में से एक है। संघ के नतीजों में एक यह है, चाहे उसका मूल उद्देश्य यह न हो, कि संघ के सीमा क्षेत्र में वाणिजय और व्यापार को स्वतंत्रता हो। इतिहास में ऐसा कोई संबंध नहीं है, जिसने संघ की एक इकाई को अंतर्राज्यीय वाणिज्य रोकने की नियत से सीमा शुल्क लगाने अथवा अन्य प्रतिबंध लगाने की अनुमति दी हो। इस नियम का भारतीय संघ अपवाद है और यह भारतीय संघ का एक लक्षण है, जो उसे अन्य संघों से सुस्पष्ट विरोधाभास के रूप में खड़ा करता है, जिससे कि आज सभी लोग परिचित हैं।

संघीय संविधान की एक विशेषता यह है कि यद्यपि संघ में सम्मिलित क्षेत्र विभिन्न इकाइयों में बंटा होता है, तथापि वे एकल क्षेत्र बनाते हैं। हर कीमत पर सीमा शुल्क के लिए समस्त क्षेत्र एक एकल इकाई मानी जाती है। हर संघीय संविधान में एक इकाई द्वारा दूसरी के विरुद्ध व्यापार और सीमा शुल्क बाधाओं को रोकने हेतु शक्तियों और निशेधों का प्रावधान है।

अमरीका का संविधान अनुच्छेद 2 की धारा 9 के अंतर्गत एक राज्य द्वारा दूसरे राज्य में माल आयत अथवा निर्यात को रोकने पर निषेध लगाता है अथवा राज्य की सीमा में माल के आने या बाहर जाने पर आयत - निर्यात शुल्क लगाने से रोकता है। अनुच्छेद 2 की धारा 8 (3) संघीय सरकार को संघ के राज्यों के मध्य वाणिज्य और व्यापार को विनियमित करने की शक्ति प्रदान करती है।

आस्ट्रेलिया में उसके संविधान की धारा 92 के अनुसार राज्य और संघीय सरकार, दोनों अपनी विनियमन की शक्ति का प्रयोग इस प्रकार करने के लिए बाध्य हैं कि संविधान की धारा 92 में प्रदत्त मूल गारंटी की अवहेलना न हो और यह कि ‘राज्यों के मध्य व्यापार और वाणिज्यि, चाहे वह आंतरिक परिवहन अथवा सामुद्रिक नौ - परिवहन द्वारा हो, पूर्ण स्वतंत्र होगा।’

कनाडा में धारा 121 के अंतर्गत किसी भी प्रांत के समस्त विकास के सामान (पैदावार अथवा उत्पादन) संघ के प्रत्येक प्रांत में निःशुलक प्रवेश के अधिकारी होंगे।