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संघ बनाम स्वतंत्रता

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भी सदस्य हो। वे जो सिर्फ राज्य की सीमा के अंतर्गत अधिवास करते हैं, जरूरी नहीं कि राज्य के सदस्य हां। जो राज्य से संबंध रखते हैं और जो संबंध नही रखते, उनके बीच यह भेद बहुत ही निर्णायक है और इसे भूलना नहीं चाहिए, क्योंकि इसके परिणाम महत्वपूर्ण हैं। जो राज्य से संबंध रखते हैं, वे सदस्य होते हैं और उन्हें सदस्यता से लाभ प्राप्त होते हैं, जिनमें राज्य से मिलने वाले संपूर्ण अधिकार और कर्त्तव्य शामिल हैं। कर्तव्य की दृष्टि से यह संबंध ‘प्रजा’ शब्द से भलीभांति जाना जाता है, अधिकारों की दृष्टि से इसे ‘नागरिक’ शब्द से अच्छी तरह परिभाषित किया गया है। इस विभेद में यह परिणाम विहित है कि जो राज्य में बिना इससे संबंध रखे अधिवास करते हैं, उन्हें सदस्यता का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता, जिसका अर्थ है कि वे विदेशी हैं, नागरिक नहीं।

सिद्धांततः एक राज्य के नागरिकों और विदेशियों के बीच भेद करने की समस्या एक मामूली - सी समस्या जान पड़ती है, वास्तव में लगभग एक यांत्रिक समस्या। एक एकारात्मक राज्य के विषय में यह खास तौर पर सच है। और यहां एक साधारण प्रश्न उठता है कि उस राज्य का किसी एक तथा समस्त विदेशी राज्यों से क्या संबंध है? एक संघीय राज्य में यह मामला इस तथ्य से उलझनपूर्ण है कि हर व्यक्ति के दोहरे संबंध होते हैं। एक ओर वह संपूर्ण रूप में संघीय राज्य से विशेष संबंध रखता है और दूसरी ओर उस राज्य से उसके विशेष संबंध होते हैं, जिसमें वह अधिवास करता है। अतः जिस क्षण संघीय राज्य में एक व्यक्ति की हैसियत परिभाषित करने की कोशिश की जाती है, उसी समय एक ही नहीं, वरन् कई प्रश्नों के उत्तर देने चाहिएंः इस व्यक्ति का संघीय राज्य से, किसी एक और सभी विदेशी राज्यों के मुकाबले क्या संबंध है? इस व्यक्ति का उस राज्य से क्या संबंध है, जिसमें वह अधिवास करता है? साथ ही, क्या यह संभव है कि व्यक्ति एक राज्य का नागरिक तो हो, पर संघीय राज्य का नागरिक न हो।

ऐसे प्रश्न कनाडा और आस्ट्रेलिया में नहीं उठे, जब से संघ बने। कारण यह था कि जो व्यक्ति अपनी संबंधित इकाइयों में अधिवास कर रहे थे, वे जन्मजात ब्रिटिश प्रजाजन थे। यह हैसियत उनके साथ तब भी बनी रही, जब संघ अस्तित्व में आया। संघ बनने पर संघ को नागरिकीकरण की शक्तियां प्राप्त हुइंर् और फलस्वरूप हर व्यक्ति जिसे संघ द्वारा नागरिकता प्राप्त हुई, संघ का नागरिक बन गया और इसीलिए इसकी हर इकाई का भी सदस्य बन गया।

ऐसे प्रश्न संयुक्त राज्य अमरीका, स्विट्जरलैंड और जर्मनी में भी उठे, क्योंकि संघ से पूर्व उनकी सभी इकाइयां विदेशी राज्य थे और उनके प्रजाजन विदेशी प्रजाजन थे। लेकिन यह विशेष ध्यान देने योग्य है कि इन सब मामलों में संघ के एक हिस्से के रूप में एक समान नागरिकता स्थापित की गई थी। एक ऐसा नियम बनाया गया, जिसके अंतर्गत यह स्वीकार किया गया कि एक इकाई की नागरिकता अपने साथ संघ की नागरिकता लाती है। भारतीय संघ का मामला संयुक्त राज्य अमरीका, जर्मनी और स्विट्जरलैंड से मिलता - जुलता है। एक देशी राज्य की प्रजा ब्रिटिश भारत और साथ ही साथ किसी भी अन्य देशी राज्य में विदेशी है। ब्रिटिश भारतीय प्रांत का निवासी हर देशी राज्य में विदेशी है।