76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
इस मामले में भारतीय संघ क्या करता है? क्या यह सभी इकाइयों को समान नागरिकता प्रदान करता है, जो संघ के सदस्य बन गए हैं? उत्तर है, नहीं। ब्रिटिश भारत का निवासी हर देशी राज्य में विदेशी माना जाएगा, यद्यपि यह संघ की स्थापना के बाद एक संघीय राज्य है, जैसे कि वह संघ की स्थापना के पूर्व था। उसी प्रकार एक संघीकृत देशी राज्य की प्रजा संघ के बाद हर ब्रिटिश भारतीय प्रांत में विदेशी रहेगी, जैसे कि वह संघ के पूर्व थी। यह एक समान नागरिकता नहीं है। संघ का पूर्ण सिद्धांत है कि एक संघीकृत राज्य का शासक राज्य का शासक रहेगा और उसके प्रजाजन उसके प्रजाजन रहेंगे तथा सम्राट संघीकृत प्रांतों का शासक होने के नाते प्रांतों का शासक रहेगा और उसके प्रजाजन उसके प्रजाजन रहेंगे।
नागरिकता का यह अंतर दो विशेष तरीकों से व्यक्त होता है। प्रथमतः यह सेवा के अधिकार के मामले में अभिव्यक्त होता है। सम्राट के अधीन संघ की स्थापना होने के कारण जो व्यक्ति सम्राट के प्रजाजन हैं, वे ही इसके अंतर्गत सेवा करने के अधिकारी हैं। इसे धारा 262 के अंतर्गत माना गया है। वास्तव में, यह राज्य के प्रजाजनों के साथ एक अन्याय है। इस अन्याय को रोकने के लिए, जो नागरिकता के अंतर के फलस्वरूप एक तार्किक परिणति है, भारत मंत्री को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह देशी राज्यों के प्रजाजनों को संघ के अंतर्गत नौकरी योग्य घोषित करे। यह एक विसंगतिपूर्ण स्थिति है और यद्यपि देशी राज्यों के प्रजाजनों के प्रति अन्याय को कम कर दिया गया है, देशी राज्यों में रोजगार के अधिकार के मामले में ब्रिटिश भारत के प्रजाजनों के प्रति अन्याय अभी कायम है, क्योंकि देशी राज्य यह घोषित नहीं करते कि ब्रिटिश भारत के प्रजाजन उनके अंतर्गत सेवा करने के पात्र होंगे। संघ के बावजूद इस प्रकार की विसंगति होना यह प्रदर्शित करता है कि संघ एक सनक है।
दूसरे, अनुसूची (4) में विधान-मंडल के सदस्यों द्वारा शपथ-ग्रहण के स्वीकृत प्रारूप से नागरिकता का यही अंतर स्वयं स्पष्ट झलकता है।
वह सदस्य जो ब्रिटिश प्रजाजन है, उसके मामले में शपथ का प्रारूप निम्न प्रकार है :
मैं, अमुक, इस परिषद (या विधान सभा) का सदस्य निर्वाचित होने (अथवा नामित या
नियुक्त होने) पर सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूं (अथवा प्रतिज्ञा करता हूं) कि मैं महामहिम
भारत सम्राट, उसके वारिसों और उत्तराधिकारियों के प्रति श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा और
अपने कर्तव्य का विश्वासपूर्वक पालन करूंगा, जिसके लिए यहां प्रवेश ले रहा हूं।
उस व्यक्ति के मामले में जो कि एक देशी राज्य का नागरिक है, शपथ का प्रारूप निम्न प्रकार होगा :
मैं, अमुक, इस परिषद (या विधान-सभा) का सदस्य निर्वाचित होने (या नामित अथवा
नियुक्त होने) पर सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूं (अथवा प्रतिज्ञा करता हूं) कि मैं सी.
डी; उसके उत्तराधिकारियों के प्रति निष्ठावान रहते हुए, इस परिषद (विधान-सभा)
के सदस्यों के नाते महामहिम, भारत स्रमाट, उनके वारियों और उत्तराधिकारियों के