2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 99

82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

में असंगत है। यह बात ध्यान में रखने योग्य है कि एक राष्ट्र बना हुआ मिल सकता है, उसी प्रकार एक राष्ट्र बनाया भी जा सकता है। एक संघीय सरकार में प्रारंभ में कोई राष्ट्र नहीं होता, यह एक विजातीय समुदायों का संकलन होता है। लेकिन यह संभव है कि संघीय सरकार में अंततः एक राष्ट्र का उदय हो। सबसे अधिक असाधरण उदाहरण संयुक्त राज्य अमरीका का है। ब्राइस एक बड़ी मजेदार और उद्देश्यपूर्ण कथा का जिक्र करते हैं, जिसे मैं उन्हीं के शब्दों में दे रहा हूं :

कुछ वर्ष पूर्व अमरीकन प्रोटेस्टेंट एपिस्कोपल चर्च अपने त्रैवार्षिक समारोह में अपनी

उपासना पद्धति संशोधित करने में व्यस्त थे। इस बात की आवश्यकता समझी गई

कि सभी व्यक्तियों के लिए संक्षिप्त वाक्य में एक प्रार्थना प्रचलित की जाए और एक

प्रमुख नव - आंग्ल धर्मावलंबी ने कुछ शब्द सुझाए, ‘हे परमात्मा, हमारे राष्ट्र को आर्शीवाद

दो।’ सभी ने एक के बाद एक इसका उसी क्षण अनुमोदन किया। दूसरे दिन इस

वाक्य पर पुनर्विचार किया गया, तब अविज्ञ - जनों ने ‘राष्ट्र’ शब्द पर कई आपत्तियां

उठाईं और राष्ट्रीय एकता की मान्यता को परिभाषित किया गया। यहां तक कि इसे

विवादित समझ कर समाप्त कर दिया गया और इसकी जगह ये शब्द अनुमोदित

किए गए, ‘हे परमात्मा, इस संयुक्त राज्य को आशीर्वाद दो।’ ईश्वर की इस प्रार्थना

के बावजूद, राज्यों के मुकाबले में एक राष्ट्र के विचार को प्रोत्साहन देने में अरुचि

होने के बावजूद और सरकार के संघीय स्वरूप के बावजूद संयुक्त राज्य एक राष्ट्र

है। यह एक राष्ट्र है, सामाजिक अर्थ में यह शब्द निर्विवाद है।

संयुक्त राज्य में यह किस प्रकार घटित हुआ? क्या संघीय योजना में हम इसे भारत में घटित होते देखना चाहते हैं? ब्राइस इसका वर्णन करते हैं कि यह सब अमरीका में कैसे हुआ। वह कहते हैं कि ‘अमरीका में केन्द्रीय या राष्ट्रीय सरकार मात्र एक लीग नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह इस में सम्मिलित समुदायों पर आश्रित नहीं है, जिन्हें हम राज्य कहते हैं। यह स्वयं एक राष्ट्रकुल और साथ ही राष्ट्रकुलों का संघ है, क्योंकि यह सीधे ही हर नागरिक से आज्ञाकारिता की अपेक्षा करता है और न्यायालयों तथा कार्यकारी अधिकारियों के जरिए उस पर सीधी कार्रवाई कर सकता है।’ यह कर लगा सकता है, उसके लिए विधि - निर्माण कर सकता है और उसे न्याय प्रदान कर सकता है। संक्षेप में, यह सरकार की प्रक्रिया है, जो व्यापक रूप में, अगर पूर्णरूपेण नहीं तो अमरीका के निवासियों को एक राष्ट्र में बदलने के लिए उत्तरदायी है और यह तभी संभव हुआ, जबकि संयुक्त राज्य की सरकार के संघीय स्वरूप में राष्ट्रीय सरकार और व्यक्ति के मध्य सीधे संपर्क का प्रावधान है।

क्या यह भारतीय संधीय शासन में संभव है? मेरा उत्तर है कि यह संभव नहीं है। देशी राज्यों के लोग राज्यों की प्रजा बने रहते हैं। संघीय सरकार उनसे सीधे कोई कार्य - व्यवहार नहीं कर सकती। हर चीज राज्य के माध्यम से होती है। दोनों में कोई संपर्क नहीं है, यहां तक कि कराधान के मामले में भी। तो यह भावना देशी राज्यों के लोगों में