86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
तथा मुद्रण शाखा के अधीक्षक और सहायक सचिव, ये सब गैर-मुसलमान हैं_ और यदि हाँ तो सरकार इन पदों पर मुसलमानों को प्रतिनिधित्व देने के लिए क्या कदम उठा रही है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रश्न के पहले भाग का उत्तर हाँ में है, केवल इस अपवाद को छोड़कर कि श्रम विभाग में लेखन-सामग्री तथा मुद्रण (स्टेशनरी एंड प्रिंटिंग) शाखा का वर्तमान अधीक्षक मुसलमान है। प्रश्न में उल्लिखित सभी पद साधारणतया योग्यता के आधार पर प्रोन्नति द्वारा भरे जाते हैं और चयन पदों पर प्रोन्नति के मामलों पर साम्प्रदायिक या जातिय प्रतिनिधित्व नियम लागू नहीं होता। साम्प्रदायिक विचार के अधीन की जाने वाली नियुक्तियों के मामले में नियमों का पालन किया जाता है और उसका पालन भविष्य में भी किया जाएगा। सरकार के विचार में कोई और कदम उठाना आवश्यक नहीं है।
मौलवी सैयद मुर्तज़ा साहिब बहादुरः क्या मैं माननीय श्रम सदस्य से यह पूछ सकता हूँ कि क्या यह सच है कि जब उसी योग्यता के दो पदस्थ व्यक्ति मैदान में थे तो एक मुसलमान को 50/- रुपये पर और उसी योग्यता के एक गैर-मुसलमान को 200/- (दो सौ) रुपये पर नियुक्त किया गया?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मेरे पास कोई जानकारी नहीं है।
मौलवी सैयद मुर्तज़ा साहिब बहादुरः क्या आप कृपा करके पूछताछ करेंगे?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं पूछताछ करूंगा।
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* श्रम विभाग के अधीन मुद्रण तथा लेखन-सामग्री शाखा में
मुसलमान अधिकारियों की कम संख्या
424. मौलवी सैयद मुर्तज़ा साहिब बहादुरः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि, मुद्रण तथा लेखन सामग्री के नियंत्रक के कार्यालय, केन्द्रीय लेखन सामग्री (स्टेशनरी) कार्यालय, कलकत्ता, केन्द्रीय प्रकाशन शाखा तथा भारत सरकार के विभिन्न मुद्रणालयों (प्रेसों) में मुसलमान राजपत्रित अधिकारियों की संख्या कितनी है_ और
(ख) क्या यह सच है कि मुद्रण तथा लेखन सामग्री के नियंत्रक के कार्यालय में सहायक नियंत्रक का पद जब से बना है तभी से उस पर बंगाली हिन्दू रहा है या
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, 30 मार्च, 1943, पृष्ठ 1584