विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 93
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@ नई दिल्ली में सचिवालय के साउथ तथा
नॉर्थ ब्लॉकों में अस्थायी कमरे इत्यादि
431. भाई परमानंदः (क) क्या माननीय श्रम-सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सही है कि नई दिल्ली के सचिवालय के साउथ तथा नॉर्थ ब्लॉकों के कुछ कारीडोरों या बरामदों को कमरों में बदला गया और उनका भारत सरकार के विभिनन कार्यालयों के कर्मचारियों द्वारा उपयोग किया जा रहा है_
(ख) क्या यह सही है कि इन परिवर्तित कमरों में से कुछ में लगभग सारे दिन धूप आती है_
(ग) क्या यह सही है कि भाग (ख) में उल्लिखित ऐसे कमरों में से कुछ कमरों में धूप से बचने के लिए केवल साधारण कांच की खिड़कियां हैं_
(घ) क्या यह सही है कि इनमें से कुछ कमरे बहुत ही संकरे (छोटे) हैं_
(घ) ऐसे परिवर्तित कमरों में से सबसे छोटे की चौड़ाई क्या है जिनमें सारे दिन धूप आती है_ ऐसे कमरों की संख्या कितनी है_
(च) इन कमरों में फरवरी के दूसरे पखवाड़े तथ मार्च के पहले पखवाड़े में दिन के समय तापमान कितना था_ इन परिवर्तित कमरों (जिनका मुंह सूरज की ओर है) में वर्ष 1942 के अप्रैल, मई, जून, जुलाई तथा अक्टूबर के महीनों के दौरान तापमान क्या था_
(छ) क्या यह सही है कि ये कमरे जलती हुई भट्ठी की तरह हैं, जहां कर्मचारी सारे दिन झुलसते रहते हैं_
(ज) क्या इन कमरों के स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा कभी यह देखने के लिए निरीक्षण किया गया कि वे गर्मी के दौरान उपयोग करने योग्य हैं और यदि हां, तो क्या उनकी रिपोर्ट यह है कि वे उपयोग लायक थे_ और
(झ) यदि (ज) के बाद के हिस्से का उत्तर सकारात्मक है तो क्या सरकार संबंधित कार्यालयों के राजपत्रित अधिकारियों के लिए इन कमरों के आवंटन पर और जो स्टाफ वर्तमान में इन कमरों में काम कर रहा है उन्हें मूल रूप से उनके लिए बनाए गए कमरों में स्थनांतरित करने के लिए विचार करने को तैयार है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ।
@ विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, 16 मार्च, 1943, पृष्ठ 1587