विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 101
तथा जब तक इन्हें पूर्ण रूप से संचालित नहीं किया जाता निक्षेप के आकार और बाहुल्यता के बार में आंकलन गलत होगा। शांति-समय परिस्थितियों में वर्तमान प्रगति की दर पर दो वर्ष का विकास उचित होगा, इससे पहले कि आवश्यक संयंत्र के बारे में कोई निर्णय लिया जाये। यद्यपि भारत सरकार युद्ध प्रयास को ध्यान में रखते हुए, यथाशीघ्र उत्पादन प्राप्त करने के लिए इच्छुक हैं, ऐसी आशा की जाती है कि लगभग तीन महीनों में किसी हद तक अयस्क की किस्म के बारे में मापन संभव होगा। यदि, इस अवधि के अंत तक देने योग्य अयस्क प्राप्त हो जाता है तो सरकार आदेश देने व अयस्क ड्रैसिंग मशीनरी लगाने के लिए कदम उठायेगी।
2. गंधकµ युद्ध के पिछड़ने पर भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण ने युद्ध-उद्देश्यों के लिए आवश्यक खनिजों की खोज के अभियान के हिस्से के रूप में गंधक पर विशेष ध्यान दिया। भारत में गंधक की अत्यधिक सम्भावित उपस्थिति बलूचिस्तान में कोह-इ-सुल्तान में एक लुप्तप्राय ज्वालामुखी के मुख में है। निक्षेपों की कार्यप्रणाली की वास्तविक सम्भावनाएं व कर्य आपूर्ति विभाग के प्रशासनिक प्रभार के अन्तर्गत किए गए, जिसने कि विशेष अधिकारी के अधीन एक छोटा खनन अनुभाग स्थापित किया। यद्यपि, प्रथम योजना की अपेक्षा खनन प्रचालनों को अधिक तकनीकी योजना की आवश्यकता थी और भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की उपयोगिता शाखा के बनने के साथ ही यह अधिक सुविधाजनक पाया गया कि वह शाखा खननकार्य सम्भाले और ऐसा ही हुआ। कोह-इ-सुल्तान में दो कार्य क्षेत्र हैंµ( i ) मीरी-जो कि ऊंचाई पर है, कम पहुंच की जगह है तथा अभी काम नहीं हुआ है_ और ( ii ) बटलµ जो कि इस समय निक्षेप है और कार्य हो रहा है। $50 प्रतिशत गंधक अयस्क का उत्पादन मानकर उसे भारतीय उद्योग को दिया गया है। बटल में संचित निक्षेप में $50 प्रतिशत के संदर्भ में गंधक अयस्क समाप्ति पर है हालांकि निम्न श्रेणी की कुछ मात्रा वहां है और उपयोगिता शाखा मीरी निक्षेपों को खोलने पर गंभीरता से विचार कर रही है जिनके पटल से अधिक समृद्ध होने की आशा है। लेकिन यातायात के मामले में काफी दिक्कत है। कोह-इ-सुल्तान विशेषतया मीरी की जलवायु बहुत ही दुष्कर है, सर्दी में अत्यधिक ठंड होती है तथा गर्मी में तीव्र गर्मी एवं अधिक तेज हवाएं चलती हैं। मजदूरों को आकर्षित करना मुश्किल होता है। दुर्गमता के कारण, मीरी से अयस्क के यातायात में कठिनाई होने की आशंका है, लेकिन उनसे निपटने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं।
अब तक मात्र $50 प्रतिशत गंधक अयस्क निकाला गया है और उपयोगिता शाखा अब निम्न श्रेणी के अयस्कों को खालेने की संभावना तथा कोह-इ-सुल्तान के निकट इसकी गुणवत्ता बढ़ाने पर विचार कर रही है।