106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* बंगाल व बिहार के कोयला खान मजदूरों के लिए
सस्ते अनाज की दुकानों की योजना
श्री के.सी. नियोगीः (क) क्या माननीय श्रम-सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि भारत सरकार के श्रम विभाग ने अप्रैल, 1942 में बंगाल एवं बिहार सरकारों को एक संदेश में, खान मजदूरों के फायदे के लिए सस्ते अनाज की दुकानों की स्थापना की योजना प्रस्तावित की थी_ यदि हां, तो उस योजना का, दोनों प्रादेशिक सरकारों से तथा कोयला उद्योग के संगठनों से क्या प्रत्युत्तर मिला_
(ख) क्या उपरोक्त योजना के विकल्पस्वरूप कोयला खान मजदूरों को खाद्यानों की सस्ती आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दोनों प्रादेशिक सरकारों ने कोई प्रभावी कार्रवाई की है_ यदि हाँ तो किस प्रकार और कब_ और
(ग) कोयला उद्योग के संगठनों या अकेली खानों द्वारा मजदूरों को सस्ते खाद्यन्न की आपूर्ति हेतु क्या कार्रवाई की गई_ यदि कोई हो तो तथा इस मामले में, दोनों प्रादेशिक सरकारों में से उनको क्या मदद दी गई, यदि मदद दी गई हो तो।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ। बिहार सरकार ने माना कि इस समस्या से निपटने के अन्य तरीके ज्यादा मान्य थे। बंगाल सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।
(ख) केन्द्र सरकार की सूचना के अनुसार दोनों प्रादेशिक सरकारों ने अपने स्थानीय अधिकारियों द्वारा खान मजदूरों को सस्ती दरों पर खाद्यान्नों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं।
(ग) यह स्पष्ट है नहीं है कि सस्ते अनाज से माननीय सदस्य का क्या अभिप्राय है। कोयला उद्योग के मुख्य मालिक संगठनों ने अपने मजदूरों को उचित मूल्यों पर
खाद्यान्न उपलब्ध कराने में उनकी सहायता की।
श्री के.सी. नियोगीः मुझे अफसोस है कि मुझे मेरे प्रश्न के द्वितीय भाग (ख) का जवाब नहीं मिला, यथा, µ ‘‘क्या दोनों प्रादेशिक सरकारों में से किसी ने कोई प्रभावी कार्रवाई की है_ यदि हाँ तो किन निर्देशों पर तथा कब?’’
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 2, अप्रैल, 1943, पृष्ठ 1735