122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
बंद किया जा रहा है क्योंकि इन खानों में काम आने वाली लाइन का एक भाग रक्षा प्राधिकारियों द्वारा प्रयोग में लाया जा रहा है, यद्यपि रक्षा सामान ओडल जंक्शन से मिलिटरी लारियों से ले जाना संभव है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी नहीं। प्रश्न का दूसरा भाग उत्पन्न नहीं होता।
(ख) 31 दिसम्बर, 1942 को बतायी गयी भंडारण संख्या उपलब्ध नहीं है। तब से भंडार संख्या एकत्र करने के संबंधित तरीके लागू किये गये हैं। ऐसा माना जाता है कि भंडारण की स्थिति खराब नहीं हुई लेकिन 31 दिसम्बर, 1942 और 31 मई, 1943 के बीच इसमें वृद्धि हुई है।
(ग) उत्तर का प्रथम भाग सकारात्मक है। उत्तर का द्वितीय भाग नकारात्मक है।
(घ) जी नहीं। काजोरा क्षेत्र में अनेक पायलट कार्यरत हैं। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि यह प्रश्न विशेषतया ओखरा सं. 1 व 2 के कार्यरत पायलट क्षेत्र से संबंधित है। लगभग 30 खानों में ये दो पायलट कार्यरत हैं। इन दो पायलटों की कोयले की क्षमता 100 वैगन हैं जिसमें लगभग 2,000 टन कोयला प्रतिदिन या 7,20,000 टन प्रति वर्ष होता है। इन दोनों पायलटों को वैगनों की अग्रिमता आधार पर आपूर्ति मिलती रही है क्योंकि उनके पास बी. और ए. रेलवे से भारी ऑर्डर हैं। बंगाल व बिहार के क्षेत्रों में वैगन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा बिल्कुल प्रतीत नहीं होता कि यदि इन पायलटों की क्षमता को बढ़ा भी दिया जाये तो खानों को प्रतिदिन 100 वैगन से अधिक मिलेंगे। रक्षा डिपो के लिए, ओखरा सं. 2 पायलट की क्षमता के अन्दर 20 वैगने प्रदान की गई लेकिन जैसा कि ऊपर बताया गया है इससे यह
खानें बंद नहीं हो जायेंगी। भारत सरकार को यह विदित नहीं है कि सेना, ओडल जंक्शन से मिलिटरी लारियों से माल ला सकती है।
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* ब्रिटिश इंडिया के तेल स्रोतों से ब्रिटिश या
अमरीकी फर्मों को रियायत
30. श्री के.सी. नियोगीः क्या माननीय श्रम-सदस्य दिनांक 30 मार्च, 1943 के तारांकित प्रश्न सं. 441 का संदर्भ देंगे और प्रत्येक मामले में मुख्य निबंधनों व शर्तों के सारांश सहित ब्रिटिश भारत के किसी भी भाग में संभावी तेल स्रोतों के संदर्भ
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 3, 2 अगस्त, 1943, पृष्ठ 287