132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
दिसम्बर, 1942 से जून, 1943 तक एक श्रम सलाहकार नियुक्त किया गया था।
वर्तमान में कोई श्रम सलाहकार नहीं है।
श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्यायः क्या वे महंगाई भत्ते पर अपनी राय देंगे?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जी नहीं।
श्री टी.टी. कृष्णामाचारीः क्या माननीय सदस्य का श्रम सलाहकार जो कि श्रम कल्याण सलाहकार से भिन्न है, कर्मचारियों के हितों का प्रतिनिधत्व करता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः बिल्कुल नहीं।
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* औद्योगिक विवादों के कारणों को तुरंत दूर करने के लिए कदम
298. श्री अमरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्यायः (क) क्या माननीय श्रम-सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि युद्ध आदेशों पर आंशिक और पूर्ण रूप से लगी निजी फैक्ट्रियों और सरकार की अपनी युद्ध फैक्ट्रियों दोनों में अबाधित रूप से युद्ध उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु औद्योगिक विवादों के कारणों को तुरंत दूर करने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं_
(ख) क्या सरकार ने कर्मचारियों के मजबूरन हड़ताल पर जाने से पहले सभी विवादों को न्याय निर्णय के लिए भेजने की व्यापक नीति अपनाने का निर्णय लिया है_ और
(ग) क्या वे प्रांतीय सरकारों को भी ऐसा करने की सलाह देने का विचार रखते हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) सरकार ने निजी रोजगार में और उसकी अपनी फैक्ट्ररियों दोनों में श्रम के लिए उचित परिस्थितियां उत्पन्न करने का प्रयास किया है। जहां विवाद उत्पन्न होते हैं वहां समझौते और न्याय-निर्णय के तरीके उपलब्ध हैं।
(ख) तथा (ग) जी नहीं। सरकार की सामान्य नीति यह है कि यदि समझौता कराने की पद्धति विफल हो जाती है तो न्याय-निर्णय का सहारा लिया जाए। प्रांतीय
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 3, 21 अगस्त, 1943, पृष्ठ 897