115 नई दिल्ली में ‘‘श्रेणी से बाहर’’ आवंटियों से सम्बंधित नियम - Page 154

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 139

मजदूरी संबंधी शर्त को शामिल किए जाने की आवश्यकता पर चर्चा की गई थी न कि श्रमिकों के साथ ‘‘न्यायोचित व्यवहार’’ पर। जहां तक केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग का संबंध है, सरकार ने पहले ही इस सिद्धांत को स्वीकार कर लिया है तथा ऐसे प्रावधान को लागू करने के लिए आवश्यक प्राथमिक कार्यवाही पर सक्रिय रूप से विचार हो रहा है।

केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग के श्रमिकों से सम्बंधित योजना लागू होने के तुरन्त बाद अन्य सरकारी विभागों की संविदाओं में ऐसे उपबन्ध की शुरूआत करने से संबंधित प्रश्न पर विचार किया जाएगा।

श्री हुसैनभाय ए. लालजीः ‘‘सक्रिय रूप से विचार’’ का क्या अर्थ है? क्या इसमें कोई समय-सीमा शामिल है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः हां, मैं विचाराधीन तथा सक्रिय रूप से विचाराधीन मामले दोनों में अंतर को एकदम स्पष्ट रूप से समझता हूँ।

श्री हुसैनभाय ए. लालजीः क्या समय का कोई अंतर है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः इसका अर्थ यह है कि मामला वास्तव में समाप्त होने वाला है।

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* नई दिल्ली में ‘‘श्रेणी से बाहर’’ आवंटियों से सम्बंधित नियम

49. मौलवी मुहम्मद घानीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि युद्ध के दौरान नई दिल्ली में आवासों के आवंटन संबंधी संशोधित नियम लागू करने से पहले उन व्यक्तियों को जिन्हें क्वार्टर आवंटित किए गए थे, श्रेणी से बाहर होने के बाद भी रियायत के रूप में उन्हीं क्वार्टरों में रहने की अनुमति दी गई थी क्योंकि उस श्रेणी में कोई आवास उपलब्ध नहीं थे जिसके वे हकदार थे_

(ख) यदि (क) का उत्तर हां में है तो जिन तारीखों को वे श्रेणी से बाहर हो गए उनकी तैनाती की तारीखें मानकर उन्हें कनिष्ट स्थिति में डालकर उन्हें नियम 7 (2) (ख) के तहत परन्तुक लागू करके उन क्वार्टरों में रहने वाले व्यक्तियों को दण्डित करने के क्या कारण है_

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 4, 9 नवम्बर, 1943, पृष्ठ 68-69