140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(ग) क्या यह सच नहीं है कि उक्त (ख) में उल्लिखित परन्तुक के लागू होने के कारण व्यक्ति निम्न श्रेणी के क्वार्टरों में अधिक लम्बे समय तक रहते हैं तथा इस तरह उन व्यक्तियों को परेशानी होती है जो परिशोधित नियम 4 के तहत उन क्वार्टरों के हकदार है क्योंकि वे परन्तुक के लागू होने के कारण आवश्यकता से अधिक समय तक इंतजार करने के लिए मजबूर हो जाते हैं_
(घ) क्या माननीय सदस्य का सूची 2 और 3 के अंतर्गत नियम 7 (ख) के तहत परन्तुक को हटाकर सभी सम्बंधियों की शिकायतों को दूर करने और पुनः विचार करने का प्रस्ताव है_
(घ) क्या माननीय सदस्य महसूस करते हैं कि नई नीति लागू करके अर्थात् कुल सेवाकाल द्वारा क्वार्टरों के लिए दावे के संबंध में वरिष्ठता के निर्धारण की नीति के कारण व्यवहारतः सभी नए लोगों को चाहे वे किसी भी श्रेणी के क्वार्टरों के लिए हकदार रहे हों, बिना क्वार्टरों के रहना पड़ेगा तथा उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा_
(च) उनकी शिकायत को दूर करने की दृष्टि से क्या उनका नियम में संशोधन करने की सम्भावना पर विचार करने का प्रस्ताव है जिससे कि उन नए लोगों के मामले में जिनको अभी तक क्वार्टर आवंटित नहीं किए गए हैं, वरिष्ठता उनकी भर्ती की तारीख से, तथा अन्यों के मामलों में उस तारीख से जब वे श्रेणी से बाहर हो गए, गिनी जाये_ और
(छ) यदि सुझाए गए संशोधन स्वीकार किए गए थे तो क्या उन्हें तत्काल प्रभवी बनाया जाएगा?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ।
(ख) दण्ड नियम 7 (2) ( XX ) (ख) के परन्तुक के बजाए, आवास की कमी के कारण ज्यादा प्रभावी हुआ है।
(ग) जी हाँ, परन्तु वर्तमान परिस्थितियों में हम विवश हैं।
(घ) जी नहीं, जब तक सरकार के पास उपब्ध आवास स्थान में वृद्धि नहीं होगी जो युद्ध के चलते समय नहीं लगती, तब तक ये शिकायतें दूर नहीं हो सकती।
(घ) मैं नहीं मानता कि ऐसी बात है परन्तु जब तक उपलब्ध आवास आवश्यकता से कम है, तब तक हम जो भी नियम बनाएं कुछ व्यक्तियों को तो कठिनाई होगी ही।
(च) इसका पहले से ही नियमों में प्रावधान है।
(छ) प्रश्न नहीं उठता।