120 नई दिल्ली में भारतीय क्लर्कों के लिए बड़े होटल का निर्माण - Page 159

144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(ख) क्या सरकार (केन्द्रीय अथवा प्रांतीय) इस संस्था को वित्तीय सहायता देती है_ यदि हाँ तो स्वीकृत सहायता की राशि क्या है_

(ग) क्या यह सच नहीं है कि महामहिम वायसराय तथा प्रांतीय गवर्नर इस संस्था के संरक्षक तथा अवैतनिक सदस्य हैं_

(घ) क्या सरकार इस बात से अवगत है कि इस संस्था ने रॉयल चार्टर प्राप्त किया है_

(च) क्या यह सच है कि इंजीनियर्स संस्था, भारत द्वारा कराई गई परीक्षाओं को इंग्लैंड में इसकी अन्य संस्थाओं जैसे इन्स्टीट्यूट ऑफ मैकेलिकल इंजीनियर्स, दी इन्स्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियर्स, दी इन्स्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स ने अभी तक मान्यता नहीं दी है_ और

(छ) क्या भारत सरकार ने इस भारतीय संस्था को मान्यता दिलाने के लिए इन ब्रिटिश संस्थाओं से अनुरोध करने के लिए महामहिम की सरकार के सामने प्रस्ताव रखा है?

माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडेकरः (क) जी हाँ।

(ख) केन्द्रीय सरकार ने इस संस्था को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी, परन्तु मेरे पास ऐसी कोई सूचना नहीं कि क्या प्रांतीय सरकारों ने ऐसा किया है अथवा नहीं।

(ग) महामहिम वॉयसराय तथा प्रांतीय गवर्नर संस्था के अवैतनिक सदस्य हैं।

(घ) जी हाँ।

(च) सरकार के पास कोई सूचना नहीं है।

(छ) यदि आवश्यक हो तो भारतीय संस्था को ही यह प्रश्न उठाना चाहिए।

अतः मैं अपने माननीय मित्र को सुझाव दूंगा कि इस मामले में वे उस संस्था को लिखे।

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* नई दिल्ली में भारतीय क्लर्कों के लिए बड़े होटल का निर्माण

145. सरदार संत सिंहः (क) क्या माननीय श्रम-सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या सरकार ने नई दिल्ली में भारतीय क्लर्कों को भोजन और आवास की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए, जिन्हें इस समय इनके लिए बहुत परेशानियां उठानी

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 4, 13 नवम्बर, 1943, पृष्ठ 242-43