128 नई दिल्ली के डी-आई-जेड- एरिया में पारम्परिक क्लर्कों के क्वार्टरों के सामने बगीचों की उपेक्षा - Page 167

152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

के सहयोग से, सामान्यतः सामाजिक शर्तों_ रोजगार तथा आवास, मजदूरी और आमदनी के प्रश्नों की जांच करने के लिए शीघ्र तंत्र स्थापित करें, तथा अपेक्षित आंकड़े और आधारभूत सामग्री की प्राप्ति के बाद जैसे ही संभव हो केन्द्रीय सरकार सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं बनाने के लिए मिली-जुली समिति नियुक्त करे।

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* नई दिल्ली के डी.आई.जेड. एरिया में पारम्परिक क्लर्कों

के क्वार्टरों के सामने बगीचों की उपेक्षा 232. सरदार सिंह संतः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि नई दिल्ली के डी.आई.जेड. एरिया में पारम्परिक क्लर्कों के क्वार्टरों के सामने के बगीचों की उचित रूप से देखरेख नहीं की जाती है_

(ख) क्या यह सच है कि ज्यादातर भूमि सूखी घास से ढकी हुई है_

(ग) क्या यह सच है कि इन बगीचों के साथ सटी सड़कों के सभी किनारों की सीध लगभग खत्म हो चुकी है, तथा सड़कों के कुछ हिस्से घास से ढक चुके हैं जबकि अन्य जगहों में घास पूरी तरह से गायब हो चुकी है तथा वह बजरी और मिट्टी से ढक गई है_

(घ) क्या यह सच है कि इन बगीचों की देखरेख करने के लिए उद्यान प्रभाग द्वारा मालियों को नियमित रूप से काम पर लगाया गया है_

(घ) क्या माननीय श्रम सदस्य इस बात से अवगत है कि ये माली महीने में एक या दो बार ही बगीचों में पानी देते हैं तथा अन्य किसी काम की ओर ध्यान नहीं देते_ और

(च) इन बगीचों की उचित ढंग से देखरेख कराने के लिए क्या सरकार कार्रवाई करने के लिए तैयार है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी नहीं।

(ख) जी नहीं।

(ग) जी नहीं।

(घ) जी हाँ।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 4, 17 अगस्त, 1943, पृष्ठ 412