2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
बम्बई, अहमदाबाद तथा कोयम्बटूर की कपड़ा मिलों में, काम बंद होने के अलावा ऐसे औद्योगिक संस्थानों की संख्या केवल एक दर्जन के लगभग थी, जिनमें से प्रत्येक में एक हजार से अधिक कर्मचारी लगे हैं और जिनमें काम आर्थिक कारणों के लिए काफी समय तक बंद रहा। लगभग दस अन्य संस्थानों में, जिनमें से प्रत्येक में लगभग एक हजार कर्मचारी लगे हैं, काम बहुत ही कम अवधि के लिए बंद रहा। एक हजार से कम कर्मचारियों वाले जिन संस्थानों में काम गैर-राजनीतिक करणों से 9 अगस्त से बंद रहा, उनकी संख्या 20 से कम थी।
काम बंद रहने वाले संस्थानों की अधिक संख्या बम्बई तथा बंगाल प्रांतों में थी, केवल आधा दर्जन संस्थान ही अन्य स्थानों में थे।
सरकार को औद्योगिक संस्थानों में, काम को बंद करने वाले व्यक्तियों द्वारा की गई किसी तोड़-फोड़ की जानकारी नहीं है।
अगस्त के दूसरे सप्ताह से हुई हड़तालों का जहां तक संबंध है, जो कि विशुद्ध रूप में आर्थिक कारणों से हुई बताई जाती है, उनकी संख्या लगभग 24 है, केवल सात संस्थानों में ही एक हजार से अधिक व्यक्ति लगे हुए हैं।
डॉ सर जि़याउद्दीन अहमदः क्या मैं यह पूछ सकता हूं कि क्या यह बात सरकार के ध्यान में लाई गई है कि जो कारखाने बंद हो गए हैं उनमें से कुछ ने अपने कर्मचारियों को बाहर जाने की अनुमति दी और उनको उस दिन का वेतन दिया?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः जो बयान पहले दिया जा चुका है, सरकार के पास उससे अधिक कोई निश्चित सूचना नहीं है। परन्तु कुछ ऐसे संकेत हैं कि कुछ मामलों में वे बातें सम्भवतः हुई हैं जिनका उल्लेख मेरे माननीय मित्र द्वारा किया गया है।
श्री लालचंद नवलरायः क्या माननीय सदस्य से मैं यह जान सकता हूं कि क्या ये हड़तालें कुछ शर्तों पर बंद हुई थी या वे स्वयं ही बंद हो गई या कुछ शर्तों पर सरकार की सहायता से बंद हुई?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः आपका प्रश्न मेरी समझ में नहीं आया।
श्री लालचंद नवलरायः माननीय सदस्य ने यह कहा है कि इनमें से कुछ हड़तालें समाप्त हो गई। अब मैं यह पूछ रहा हूं कि क्या वे सरकार द्वारा प्रस्तुत किन्हीं शर्तों पर बंद हुई या वे स्वयं ही उनकी अपनी इच्छा पर समाप्त हो गई या क्या ये हड़तालें किसी शर्त पर समाप्त हुई हैं?