132 कामगारों के लिए युद्ध बोनस के संबंध में वी-जी- बालवेक का अभ्यावेदन - Page 170

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 155

(ख) क्या सरकार का रेलवे अधिकारियों द्वारा मजदूरी भुगतान अधिनियम के ऐसे उल्लंघनों पर उचित एवं प्रभावी रोक लगाने की दृष्टि से वर्तमान तंत्र में बदलाव करने के औचित्य पर विचार करने का प्रस्ताव है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) माननीय सदस्य ने जो सुझाव दिया है वह सत्य नहीं है। यह तथ्य कि ऐसी बहुत सारी अनियमितताएं प्रत्येक वर्ष प्रकाश में लाई जाती हैं तथा रेलवे श्रम पर्यवेक्षक के कहने पर ठीक की जाती हैं इस बात को सिद्ध करता है, जो इस उद्देश्य के लिए अब विद्यमान है, कि यह तंत्र पूरी तरह कारगर है।

(ख) प्रश्न नहीं उठता।

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* कामगारों के लिए युद्ध बोनस के संबंध में

वी.जी. बालवेक का अभ्यावेदन

239. श्री गोविन्द वी. देशमुखः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किःµ

(क) क्या उन्हें कामगारों के लिए युद्ध बोनस के संबंध में 1943 के अक्टूबर माह में केन्द्रीय प्रांतों तथा बेरार प्रांतीय कामगार महासंघ, नागपुर के अध्यक्ष श्री वी. जी. बालवेक से अभ्यावेदन प्राप्त हुआ है_

(ख) क्या सरकार एक्प्रेस एण्ड मॉडल मिल्स द्वारा अतिरिक्त युद्ध बोनस से जुड़ी शर्त के बारे में किसी निर्णय पर पहुंची है अर्थात् भारत सरकार को निर्णय लेना है कि क्या युद्ध बोनस के रूप में दो महीने से ज्यादा की मजदूरी को ऐसा व्यय माना जा सकता है जिस पर कम्पनी को कोई कर नहीं देना पड़ेगा_ यदि हाँ तो उनका निर्णय क्या है_ तथा

(ग) यदि मिल मालिक प्रांत में 14 नवंबर, 1943 तक युद्ध बोनस की उस अतिरिक्त अथवा द्वितीय किस्त का भुगतान नहीं करेंगे तो 15 नवम्बर, 1943 से केन्द्रीय प्रांतों की कार्य समिति तथा बेरार टेक्सटाइल कामगार महासंघ पड़ताल पर चले जाएंगे, क्या वे उनके इस निर्णय से अवगत हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी नहीं।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 4, 17 नवम्बर, 1943, पृष्ठ 416