158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
इसके बारे में अभी तक कोई विस्तृत जांच नहीं की गई और यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि गत जनवरी से ब्रिटिश इंडिया और भारतीय प्रांतों/ रियासतों दोनों में कोयले के उत्पादन में भारी कमी हुई है_
(ख) यदि (क) का उत्तर ‘हाँ’ में है तो क्या माननीय सदस्य यह बताएंगे कि जब से इस कमी का पता चला तब से अब तक प्रति मास यह कमी कितनी रही_
(ग) क्या किसी व्यापार संगठन अथवा व्यापार के किसी सदस्य ने सरकार की सूचना के लिए होने वाले कोयले की कमी के बारे में कोई चेतावनी दी थी और यदि हाँ तो सरकार के समक्ष पहली बार ऐसी चेतावनी कब आई और इस संबंध में क्या कदम उठाए गए?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) गत वर्ष के इसी महीने की तुलना में ब्रिटिश इंडिया और भारतीय प्रांतों/रियासतों में 1943 के दौरान कोयले के उत्पादन में कमी आई है। वर्ष के प्रथम पांच महीने में यह कमी कम थीः परन्तु जून के बाद में यह कमी काफी अधिक हो गई।
(ख) वर्ष 1940 कोयले के उत्पादन के लिए सबसे अधिक उत्पादन का वर्ष था। उसके बाद वर्ष प्रतिवर्ष उत्पादन में कुछ कमी आती गई। यह कमी जून, 1943 से गंभीर अनुपात के साथ अधिक हो गई। यदि 1942 के इन्हीं महीनों के उत्पादन की तुलना की जाए तो इसी वर्ष जून, जुलाई और अगस्त का उत्पादन लगभग 353,000 टन प्रति मास कम हुआ जबकि सितम्बर में 299,000 टन की कमी देखी गई।
(ग) अगस्त, 1943 में इस व्यापार में लगे एक सदस्य द्वारा चेतावनी दी गई थी। सरकार को उस समय तक पहले से ही इस स्थिति का पता लग गया था और सरकार सक्रिय होकर इसके उपचार के साधनों पर विचार कर रही थी। आगे दिए गए कुछ प्रमुख कदम हैं जो इस स्थिति को सुधारने के लिए उठाए गए।
(1) अधिक वैगन उपलब्ध कराए गए ताकि कोयला ले जाया जा सके और यह व्यवस्था विशेष रूप से बंगाल और बिहार के कोयला क्षेत्रों में की गई।
(2) कोयला खानों के भंडार (स्टोर) और मशीनरी को शीघ्र पहुंचाने की व्यवस्था करने के लिए प्रयत्न किए जा रहे हैं।
(3) अगस्त से महिलाओं को सैंट्रल प्रोवेंसिस ओर बरार के कोयला-क्षेत्रों में भूमिगत स्थलों में कार्य करने की अनुमति दी गई है।