135 दिल्ली में आयोजित कोयला व्यापार सम्मेलन - Page 174

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 159

(4) कोयला क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाइयों से कोयला क्षेत्र के मजदूरों के साथ हस्तक्षेप को रोकने के लिए कार्रवाई की गई है।

(50 ऐसी योजनाएं तैयार की जा रही हैं कि कोयला क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं और विशेष रूप से खाद्य-सामग्री की अधिक मात्रा उपलब्ध कराई जाए और इस बात के प्रबंध किए जा रहे हैं कि खनन मजदूरों को रियायती दरों पर पर्याप्त राशन दिया जाए।

(6) कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति बंगाल और बिहार के कोयला क्षेत्रों में की जा रही है ताकि खनन क्षेत्र में कार्य करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य और सामान्य कल्याण को प्रोन्नत किया जाए।

श्री के.सी. नियोगीः क्या माननीय सदस्य उन प्रमुख कारकों को बताने की स्थिति में हैं जिनकी वजह से कोयला-उत्पादन की यह कमी हुई?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमान्! मुख्य कारक यह है कि कोयला की कमी का कारण निसंदेह मजदूरों की कमी रही और इसका कारण यह है कि ‘अधिक अन्न उपजाओं’ आंदोलन और सैन्य-निर्माण कार्यों द्वारा कोयला क्षेत्र से मजदूरों को हटा लिया गया है। यह गतिविधियां लगभग उसी क्षेत्र में प्रारंभ की गई थीं जहाँ कोयला खान स्थिति है।

135

* दिल्ली में आयोजित कोयला व्यापार सम्मेलन

251. के.सी. नियोगीः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि गत 23 अक्तूबर को आपकी अध्यक्षता में दिल्ली में कोयला व्यापार और अय विषयों से संबंधित प्रतिनिधियों के सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कोयला के उत्पादन में वृद्धि करने के प्रश्न पर विचार करना था_ यदि हाँ तो किन परिस्थितियों में इस सम्मेलन का आयोजन करने का निर्णय लिया गया और इसमें किए गए विचार-विमर्श का क्या परिणाम रहा_

(ख) क्या भारत से युद्ध के प्रयोजनों अथवा अन्य कारणों से कोयले के बढ़े हुए निर्यात को बढ़ाने की आवश्यकता द्वारा किसी सीमा तक कोयले के उत्पादन की वृद्धि के लिए मौजूदा प्रयत्न प्रभावित हुआ है_

(ग) क्या यह सच है कि श्रम विभाग द्वारा सम्मेलन के अतिथियों को जारी किए गए पत्र में भारतीय कोयले की बढ़ती हुई मांग के साथ कोयले के उत्पादन में

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 4, 17 नवम्बर, 1943, पृष्ठ 422-23