135 दिल्ली में आयोजित कोयला व्यापार सम्मेलन - Page 175

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

लगातार भारी कमी आई है, यह कोयले की मांग भारत और विदेश से आई है और क्या इससे केन्द्रीय सरकार को भारी चिन्ता हो गई है, सर्व प्रथम यह चिन्ता भारत सरकार को कब हुई और उसके कारण कौन-सी परिस्थितियां हैं, इस स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से क्या कार्रवाई की गई है और सका क्या फल हुआ है, और

(घ) क्या देश में कोयले की आंतरिक सप्लाई सरकार की किसी ऐसी नीति द्वारा किसी भी तरीके से प्रभावित होने वाली है जो सरकार अथवा निजी लेखे के कारण कोयले के निर्यात को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई हो?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ, सरकार का यह विश्वास था कि कोयले के उत्पादन की कमी का एक कारण यह था कि मजदूरों की कमी थी। यदि मजदूरों की कमी को पूरा किया जा सकता था तो कोयले के उत्पादन की कमी को रोका जा सकता था और लक्ष्य के अनुसार आंकड़ों तक उत्पादन संभव हो जाता। सरकार इस बात से चिन्तित थी कि ऐसे किन्हीं भी साधनों में नियोक्ताओं का पूर्ण सयोग मिले जो इस उद्देश्य के लिए प्रस्तावित किए गए थे। इस वाद-विवाद का मुख्य परिणाम ऐसा समझौता था कि बंगाल और बिहार के नियोक्ताओं के संघ (एम्प्लायर्स एसोसियेशन्स) को अपने मजदूरों के लिए खाद्यान्न और अन्य सामान की सप्लाई के लिए एक जैसे आधार पर योजनाओं को प्रारंभ करना चाहिए तथा भारत सरकार को ऐसी योजनाओं को प्रभावी बनाने में संघों की सहायतार करनी चाहिए।

(ख) कोयले के उत्पादन में वृद्धि आवश्यक है ताकि भारतीय उद्योग की आंतरिक आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके जैसा उद्योग बढ़े हैं और कोयले के उत्पाद में कमी आ गई है।

(ग)? जी हाँ, युद्ध के प्रारंभ होने के समय से सरकार इस बात से चिन्तित है कि कोयले का उत्पादन अधिकाधिक रखा जाए। सबसे अधिक कोयले का उत्पादन 1940 में हुआ। 1940 के आंकड़े की तुलना में 1941 में कोयले के उत्पादन में कुछ विशेष कमी आई और 1942 में भी कुछ अधिक कमी आई। ऐसा लगता है कि वर्ष 1943 में 1942 के आंकड़ों की तुलना में कुछ विशेष कमी आएगी।

इस वर्ष के लगभग जून से यह स्पष्ट हो गया कि युद्ध-उद्योगों, रेलवे और प्रथम महत्व की सैन्य परियोजनाओं जैसे आवश्यक उपभोक्ताओं द्वारा बढ़ाई गई मांगों की पूर्ति के लिए कोयले का उत्पादन पर्याप्त न था। तदनुसार कोयले के सभी उपभोक्ताओं के कोयले की सप्लाई का राशन कर दिया गया। इन राशन की गई मांगों की और बाध्य मांगों की पूर्ति के लिए, जैसा कि उनकी पूर्ति महसूस की गई, सरकार को