विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 171
चयन के बिना पाँच दलित वर्ग के व्यक्तियों को निरीक्षकों के पदों पर नियुक्त करना न्यायोचित था_ क्या वे बम्बई के अपने ही प्रांत के संबंधियों में से हैं_
(ख) क्या समझौता अधिकारी (रेलवे) और पर्यवेक्षक, (रेलवे मजदूर) द्वारा अपने ही संबंधियों और अपने ही सम्प्रदाय के लोगों को लिपिक और निरीक्षक के पदों पर नियुक्त करना न्यायोचित था_ क्या माननीय सदस्य इस बात से अवगत हैं कि अन्य प्रांतों में भी योग्यता प्राप्त दलित वर्ग के उम्मीदवार थे_
(ग) उन व्यक्तियों के दावों पर विचार क्यों नहीं किया गया जिन्होंने निरीक्षकों के रूप में स्थानापन्न व्यक्तियों की विश्वसनीयता पर एक बार सेवा की थी, और
(घ) रेलवे मजदूरों के पर्यवेक्षक ने चयन बोर्ड से परामर्श किए बिना निरीक्षकों की नियुक्ति क्यों की?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क), (ग) और (घ) मैं पिछले प्रश्न के अपने उत्तर का संदर्भ देना चाहूंगा। नियुक्त किए गए उम्मीदवार समझौता अधिकारी (रेलवे) और पर्यवेक्षक (रेलवे मजदूर) से सम्बंधित नहीं थे।
(ख) मैंने निरीक्षकों के संबंध में सूचना दी है। ग्यारह लिपिकों के संबंध में केवल एक लिपिक अनुसूचित जाति का है जिसे समझौता अधिकारी (रेलवे) ने नियुक्त किया है।
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* रेलवे मजदूरों के निरीक्षकों के पदों पर
दलित वर्ग के व्यक्तियों की नियुक्तियां
7. श्री मोहम्मद हुसैन चौधरीः क्या माननीय श्रम सदस्य रेलवे मजदूरों के निरीक्षकों के पांचों रिक्त पदों को एक चयन बोर्ड बनाकर भरने की वांछनीयता पर विचार करेंगे ताकि सभी समुदायों के न्यायोचित दावे खतरे में न पड़ें?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः निरीक्षकों के पदों को भरने के प्रश्न पर सरकार विचार कर रही है।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), 1943 का खण्ड 1, 1944, 7 फरवरी, 1944, पृष्ठ 26