176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* कोयला खानों में भूमिगत स्थलों में कार्य पर लगी
महिलाओं के रोजगार की पाबन्दी का हटाया जाना
सभापति (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः अगला प्रस्ताव श्रीमती रेणुका रे के नाम से है। उनकी इच्छा है कि झीरिया और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में कोयला खानों में भूमिगत स्थलों में कार्य करने वाली महिलाओं को दी गई अनुमति के प्रश्न पर विचार-विमर्श किया जाए।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य) ः मैं केवल एक ही विचार प्रस्तुत करना चाहूंगा, जो इस मामले में है जिसे इस स्थगन प्रस्ताव पर उठाने की अनुमति मांगी गई है यह मामला हाल ही की घटना नहीं कहा जा सकता। मूल विज्ञप्तियां दो हैं जिनके अधीन निषेधाज्ञाओं को हटा दिया गया था_ एक 2 अगस्त, 1943 की है और दूसरी 18 अगस्त, 1943 की है। तारीख 24 नवम्बर, 1943 की विज्ञप्ति केवल उस विज्ञप्ति के अनुक्रम में है जिसके बारे में मैं पहले ही बता चुका हूँ और वह अगस्त 1943 की नहीं है। अगस्त में विज्ञप्तियों के जारी किए जाने के बाद विधानमंडल के सत्र का आयोजन किया गया था।
सभापति महोदय (सर अब्दुर रहीम) ः यह विज्ञप्ति क्या थी? क्या महिलाओं को भूमिगत स्थलों में कार्य करने की अनुमति दी गई थी?
मानीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य) ः जी हां, मैं यह भी बताना चाहूंगा कि इस प्रस्ताव की इन औपचारिक आपत्तियों पर मैं कोई मंच नहीं बनाना चाहता और यदि सदन इस मामले में विचार-विमर्श करना चाहता है तो मैं भी इसमें शामिल होने के लिए तैयार हूं।
श्री एन.एम. जोशी (नामांकित गैर-सरकारी) ः क्या मैं इस विषय में कुछ कह सकता हूँ? यद्यपि भारत सरकार ने विधान-सभा के गत सत्र से पूर्व अपनी विज्ञप्ति जारी कर दी थी तथापि सबसे महत्वपूर्ण कोयला खदानों में हाल ही में उन्हें प्रभावी बनाया गया। इसलिए मैं यह महसूस करता हूँ कि यह विषय महत्व का है और यह हाल की घटना है।
सभापति (माननीय सर अब्दुर रहमान)ः अगस्त की विज्ञाप्ति झीरिया और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों से संबंधित नहीं हैं?
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1944, 7 फरवरी, 1944, पृष्ठ 93