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विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 177

श्री एन.एम. जोशीः नहीं।

सभापति महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम)ः क्या इन क्षेत्रों को विज्ञप्तियों से अलग कर दिया गया है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः नहीं, हम एक अवस्था से दूसरी अवस्था के क्रम में आगे बढ़े हैं। इस निषेज्ञा को उठाने का भारत सरकार का इरादा 2 अगस्त, 1943 का था। यह स्माइल प्राविनसेज और बरार प्रांतों पर लागू किया गया था।

श्रीमती रेणुका रे (नामांकित गैर-सरकारी) ः क्या मैं बता सकती हूं कि 2 और 18 अगस्त, 1943 की विज्ञप्तियों का विरोध किया गया था परन्तु सरकार ने उन विरोधों की ओर ध्यान नहीं दिया। चाहे कुछ भी मामला क्यों न हो, मैंने केवल झीरिया और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित किया है तथा इनसे संबंधित विज्ञप्तियां विधानमण्डल के अंतिम सत्र के बाद लाई गई।

सभापति महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः यदि ऐसा है और प्रभारी श्रम सदस्य को इस प्रस्ताव पर बहस करने के लिए कोई आपत्ति नहीं है तो इस प्रस्ताव पर 4 बजे बहस की जाएगी।

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* भारत में कोयले का संरक्षण

80 श्री के.सी. नियोगीः (क) क्या पटना विश्वविद्यालय में दिसम्बर, 1943 में दिए गए कतिपय भाषणों के दौरान डॉ. एच.के. सेन, निदेशक, इंडियन लैक रिसर्च इन्स्टीट्यूट (भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान), रांची और अध्यक्ष, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान बोर्ड की ईंधन अनुसंधान समिति द्वारा भारतीय कोयला के संरक्षण के प्रश्न पर की गई टिप्पणियों पर माननीय श्रम सदस्य का ध्यान आकर्षित किया गया है_

(ख) क्या यह सच है कि यह प्रश्न समय-समय पर सरकार के विचारार्थ अलग-अलग विशेषज्ञों ने उठाया है_ यदि हाँ तो सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है_

(ग) जैसा कि डॉ. सेन ने अपने भाषण में बताया था, कम ग्रेड के कोयला को रेलवे में उपयोग किया जाना चाहिए, क्या सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है अथवा भविष्य में कार्रवाई करने का प्रस्ताव है_ और

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1944, 10 फरवरी, 1944, पृष्ठ 203-4