152 भारत में कोयले का संरक्षण - Page 193

178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

(घ) देश में वर्तमान कोयला की स्थिति की कठिनाइयों को विशेष रूप से दृष्टि में रखते हुए क्या इन प्रश्नों पर शीघ्र विचार किया जा रहा है?

मानीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) नहीं।

(ख) जी हाँ।

(i) 1939 में भारत सरकार ने केवल माइन्स स्टोइंग एक्ट पारित किया। स्टोइंग

के लिए सहायता दी और इसके फलस्वरूप उच्च गुणवत्ता के कोयले के

संरक्षण में पर्याप्त सफलता मिली है।

(ii) 1939 में पारित इंडियन कोल माइन्स ऐयूलेशन्स के अधीन कतिपय विनियम

के अंतर्गत कार्य के आयामों पर प्रतिबंध लगाए गए जो सुरक्षा के अलावा

कोयले के संरक्षण के लिए विशेष सहायक रहे।

(ग) एम्सर्पा कम्बशन इंजीनियरों को कोयला वितरण के नियंत्रण के कार्यालय के साथ सम्बद्ध किया गया है, इनके कर्त्तव्यों में से एक कर्त्तव्य यह होगा कि उद्योगों के बारे में आश्वस्त किया जाए कि वे निचले स्तर के कोयले की खपत कर लेते हैं और उन्हें उच्च स्तर के कोयले की सप्लाई नहीं की जाती। प्रांतीय सरकारों की सहायता मांगी गई है ताकि कम्बशन इंजीनियरों के परामर्श के अनुसार बॉयलर निरीक्षकों की एजेंसी द्वारा कोयले के खपत करने वाले कारखानों का सर्वेक्षण किया जाए। सरकार जोरदार ईंधन की बचत के आंदोलन को महत्व देती है और इसकी ओर पहले ही से कोयला आयुक्त का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। रेलवे की मांगों के लिए विभिन्न सेवाओं हेतु अधिक मात्रा में निम्न स्तर के कोयले की सप्लाई की जाती है।

(घ) इन प्रश्नों पर सरकार लगातार विचार कर रही है।

श्री के.सी. नियोगीः मेरा विचार है कि माननीय सदस्य ने कहा कि उनका ध्यान उन बातों की ओर नहीं उठाया गया जिनका मैंने उल्लेख किया है।

माननीय डॉ.बी.आर. अम्बेडकरः मेरा ध्यान उन भाषणों की ओर नहीं दिलाया गया जिनका उल्लेख माननीय सदस्य ने किया है।

श्री के.सी. नियोगीः परन्तु समाचारपत्रों में इन भाषणों की चर्चा की गई थी।

माननीय डॉ. बी.आर अम्बेडकरः ऐसा हो सकता है।

श्री के.सी. नियोगीः परन्तु क्या यह आशा नहीं की जाती कि माननीय सदस्य को ऐसी महत्वपूर्ण बातों की ओर ध्यान देना चाहिए?