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182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

उद्योगों से संबंधित विभागों द्वारा की गई सिफारिशों के साथ एक जैसे होते हैं। दिन-प्रति-दिन ब्यौरेवार अनुदेश प्रत्येक कोयला खान को जारी किए जाते हैं जिनका संबंध उस परेषिती से होता है जिनके लिए कोयला भरा जाना चाहिए। कोयला-खानों के मालिकों की ओर से वास्तविक लदान का तौल डिपो स्टेशन पर चैक किया जाता है। डिपो स्टेशन द्वारा एकत्र किए गए विवरण आवंटन कार्यालयों द्वारा फिर से जांचे जाते हैं। रेलवे और नियंत्रण संगठन के अधीन काम करने वाले निरीक्षक आगमन स्टेशनों तथा गंतव्य स्टेशन की वास्तविक बुकिंग की प्रायः जांच-पड़ताल करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोयले की खानों के मालिकों ने उस परेषिती को वैगन बुक किए हैं जिसे प्राथमिकता के प्रमाणपत्र के अनुसार वैगन आवंटित किया गया है तथा गंतव्य स्टेशन पर उचित परेषिती को वैगन मिले तथा खुले बाजार में न जाने दिया जाए। कोयले में ऐसे अनेक मामले पकड़े गए हैं जिनमें कोयले को काले बाजार में भेजा गया है तथा इस संबंध में अभियोग भी प्रारंभ किए गए हैं।

(घ) इस बात का हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि रेलवे कोयला-खानों की पूरी क्षमता का विकास शीघ्रता से किया जाए जैसी कि परिस्थितियां अनुमति देती हैं। इस संबंध में काफी प्रगति हो गई है। मैं अभी भी यह बताने की स्थिति में नहीं कि सभी रेलवे की खानें अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं। वर्तमान कठिनाइयों के कारण इस प्रकार हैंः

(i) मजदूरों की कमी,

(ii) मेकेनिकल प्लांट के प्रारंभ किए जाने में अपरिहार्य रूप से देरी,

(iii) बढ़ते हुए उत्पादन को बढ़ाने के लिए लाइन की क्षमता का अभाव।

ये सभी कठिनाइयां निकट भविष्य में दूर किये जाने की आशा की जाती है।

सर मोहम्मद यामीन खांः इस प्रश्न के भाग (ख) के उत्तर में माननीय सदस्य ने ऐसी कोयला खानों के बारे में बताया है जो अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार कार्य नहीं कर रही हैं। इनमें से कितनी कोयला-खानें यूरोपीय कम्पनियों का प्रतिनिधित्व करती हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उसके बारे में इस अवस्था में कोई भी उत्तर देने में असमर्थ हूँ। मैं यह नहीं सोचता कि हमें ऐसी कोई सूचना मिल सकती है कि कितनी कोयले की खानें अपनी पूरी क्षमता से कार्य नहीं कर रही हैं और उनमें से कौन-सी कोयले की खानें यूरोपीय मालिकों की हैं और कौन-सी कोयले की खानें भारतीय मालिकों की हैं।