156 प्रान्तों में नागरिक अग्रणी बल (सिविल पायनियर फोर्स) में कमीशन प्राप्त अधिकारियों के रूप में पदोन्नत प्रशासकीय अधिकारी - Page 200

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 185

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* कोयला खान सुरक्षा (माल-भराई) संशोधन विधेयक

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः सभापति महोदय, सदन के कुछ माननीय सदस्यों द्वारा अभिव्यक्त इच्छा की दृष्टि से कि वे इस विधेयक पर विचार करने के लिए कुछ अधिक समय लेना चाहेंगे, मैं उस विधेयक के विचार के लिए कोई प्रस्ताव नहीं करता जो मेरे नाम में है।

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** प्रान्तों में नागरिक अग्रणी बल (सिविल पायनियर

फोर्स) में कमीशन प्राप्त अधिकारियों के रूप

में पदोन्नत प्रशासकीय अधिकारी

111. श्री जी. रंगय्या नायडूः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) वर्ष 1941, 1942 और 1943 में विभिन्न प्रांतों में नागरिक अग्रणी बल (सिविल पायनियर फोर्स) में कमीशन प्राप्त अधिकारियों के रूप में कितने प्रशासकीय अधिकारियों की पदोन्नति की गई_ यदि ऐसा नहीं किया गया, तो क्यों नहीं किया गया_

(ख) क्या बाद में कोई ऐसा कानून पारित किया गया जिसके द्वारा नागरिक अग्रणी बल के अधिकारियों को सेना में कमीशन प्राप्त अधिकारियों के पदों के लिए आवेदन करने पर प्रतिबंध लगाया गया हो_

(ग) उन कमीशन प्राप्त अधिकारियों और प्रशासनीय अधिकारियों की संख्या कितनी है जिन्हें हिन्दुओं तथा ब्राह्मणों के अलावा अन्य जातियों, पिछड़ी और अनुसूचित सम्प्रदायों तथा ईसाइयों, मुसलमानों और एंग्लोइंडियनों में से भर्ती किया गया हो_

(घ) पायनियर के प्रतिदिन के राशन और प्रशासकीय अधिकारियों के प्रतिदिन के राशन की अलग-अलग दर क्या है_ और

(घ) सिविल पायनियर फोर्स (नागरिक अग्रणी बल) में उन लिपिकों की संख्या क्या है जिनकी 1941, 1942 और 1943 में प्रशासकीय अधिकारियों के पद पर पदोन्नति की गई थी_ यदि ऐसा नहीं किया तो इसके क्या कारण हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क), (ग) और (ख)। प्रश्न के इन भागों के संबंध में वांछित सूचना के अलग-अलग विवरण सभा-पटल पर रख दिए गए हैं।

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1944, 10 फरवरी, 1944, पृष्ठ 211 ** वही।