190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(घ) नहीं, समिति महामहिम गवर्नर-जनरल को ही सिफारिश कर सकती है।
(च) ऊपर बताए गए (घ) के उत्तर की दृष्टि से यह प्रश्न नहीं उठता।
सर एफ.ई. जेम्सः मेरे माननीय मित्र निस्संदेह उन कठिनाइयों से अवगत होंगे जो इस नियम के कठोरता से पालन करने के कारण सरकारी नौकरी में पूर्णतः श्रेष्ठ, कठोर परिश्रमी और सुपात्र महिलाओं को उठानी पड़ती हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इस बात से अवगत हूँ।
श्री एन.एम. जोशीः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि अनेक लोगों द्वारा महसूस की गई इन कठिनाइयों की दृष्टि से आवास का राशनिंग प्रारंभ किया गया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं इस अवस्था में कोई उत्तर नहीं दे सकता।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्राः क्या मैं यह पूछ सकता हूँ कि आवास परामर्शदात्री समिति को कब नियुक्त किया गया था और इस समिति को किसने नियुक्त किया था?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे इस अवस्था में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।
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* कोयला खानों में महिला मजदूरों को काम पर रखा जाना
114. श्री लालचंद नवलरायः (क) क्या श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि माननीय सदस्य ने महिलाओं को कोयले की खानों में पुनः काम पर रखना शुरू कर दिया है_
(ख) क्या यह सच है कि भारत में कोयला खानों में महिला मजदूरों को लोकप्रिय दबाव के अधीन काम करने से रोक दिया गया था_
(ग) क्या यह सच है कि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया श्री एमरी ने हाऊस ऑफ कॉमन्स में हाल ही में पूछे गये प्रश्न का उत्तर देने में टालमटोल की कि क्या महिला मजदूरों को वही मजदूरी दी जाती थी जो पुरुषों को दी जाती थी और क्या वे भूमिगत स्थलों में कार्य कर रही थी_
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1944, 16 फरवरी, 1944, पृष्ठ 286-87