158 कोयला खानों में महिला मजदूरों को काम पर रखा जाना - Page 206

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 191

(घ) क्या माननीय सदस्य ऊपर बताए गए (ग) में उल्लिखित दोनों बातों के बारे में वक्तव्य देने का विचार रखते हैं_

(घ) क्या यह सच है कि भारत में कोयला खानों में काम करने के लिए पुरुष मजदूर उपलब्ध हैं_ यदि हां तो उन्हें महिला मजदूरों के स्थान पर क्यों नहीं रखा जाता_

(च) क्या यह सच है कि महिलाओं को काम पर इसलिए लगाया जाता है कि वे अधिक पश्रिम करती हैं और थोड़ी-सी मजदूरी प्राप्त करके संतुष्ट हो जाती हैं यद्यपि उनका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और उनके परिवार टूट जाते हैं और यदि नहीं तो इसके विशेष कारण क्या हैं कि पुरुषों के बजाय महिलाओं को काम पर लगाया जाता है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) अब सेण्ट्रल प्राविन्सेज़ और बरार, बंगाल, बिहार और उड़ीसा में कोयला खानों में भूमिगत स्थलों में महिला मजदूरों को काम करने की अनुमति दी जाती है।

(ख) वर्षों से भारत सरकार की जानबूझ कर नीति रही है कि भारत में कोयला-खानों में भूमिगत स्थलों में काम करने के लिए महिला मजदूर न रखे जाएं। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए इण्डियन माइन्स एक्ट, 1923 में व्यवस्था की गई थी। 1929 में महिलाओं को भूमिगत स्थलों में काम करने के लिए रोक दिया गया और 1937 में यह प्रक्रिया पूरी हुई।

(ग) मेरे पास कोई सूचना नहीं है।

(घ) नहीं। मैंने 8 फरवरी को श्रीमती रेणुका रे द्वारा प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव के उत्तर में दोनों बातों पर वक्तव्य दिया है।

(घ) महिला मजदूरों को भूमिगत स्थलों में काम करने की अनुमति इसलिए दी गई है कि पुरुष मजदूरों की कमी है। जैसे ही सरकार द्वारा आवश्यक कोयले की मात्रा के उत्पादन के लिए पर्याप्त पुरुष-श्रम शक्ति आश्वस्त हो जाती है वैसे ही सरकार महिलाओं को भूमिगत स्थलों में काम करने के लिए यह प्रतिबंध फिर लगा देगी। सरकार इस बात के लिए शीघ्र कदम उठा रही है कि बंगाल और बिहार की कोयला की खानों से पुरुष मजदूरों को लाया जाए।

(च) नहीं। (घ) के उत्तर में जैसा कहा गया है कि महिलाओं को कतिपय कोयला खानों में भूमिगत स्थलों में काम करने की अनुमति दी गई है क्योंकि पर्याप्त संख्या में पुरुष मजदूर उपलब्ध नहीं थे।