6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(घ) इस अनुमान के उद्देश्य को बढ़ाने के लिए अब तक कौन-से व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं ऐसे कदम किन खनिजों के संबंध में और किन विशेषज्ञों की सहायता से, तथा किस मूल उद्देश्य की दृष्टि से उठाए गए हैं_
(च) क्या उपयोगिता अनुभाग के प्रयासों को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान और वाणिज्यिक विभाग से संलग्न उपयोगिता से संबंधित संगठन के क्रियाकलापों के साथ समन्वित किया जाता है_ और यदि हां तो किस तरीके से?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) हाँ, फिर भी यदि किसी विशेष खनिज के लिए अत्यंत तीव्र मांग होगी तो कार्यक्रम में परिवर्तन किया जा सकता है।
(ख) वे सभी खनिज, जिनकी आवश्यकता युद्ध के कार्यों के लिए है और जिनके लिए भारत में काम की उपयुक्त संभावना है। इनमें सल्फर, माइका, टंगस्टन या वोलफ्रांम, तथा अलौह धातु जैसे लीड, जिंक, तांबा तथा टिन शामिल हैं।
(ग) विशेषज्ञों की सहायता से उपयोगिता शाखा निक्षेपों को प्रभावित करेंगी और लघु-पैमाने के खनन कार्यों को शुरू करेगी जिनमें धातुओं को गलाकर साफ करने आदि के लिए प्रयोगात्मक तथा पायलट संयंत्रों के उस अवस्था तक कार्य शामिल हो सकते हैं, जब यह स्पष्ट हो जाता है कि उत्पादन को वाणिज्यि फर्मों द्वारा अपनाया जा सकत है। वर्तमान भावना यह है (युद्ध के उत्पादन के बनाए रखने की आवश्यकता तथा प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के अधीन) के उस स्तर पर वाणिज्य के विकास को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
(घ) नहीं, वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार।
(घ) उपयोगिता शाखा लीड (जस्ता) तथा जिंक का शीघ्रता से उत्पादन प्राप्त करने की संभावना की जांच पड़ताल करने के लिए पहले से कदम उठा चुकी है। लीड जिंक की भारत में सबसे अधिक आशाजनक खानें उदयपुर राज्य में जावर की
खानें प्रतीत होती हैं। श्री डब्ल्यू. पी. कोवन जो बर्मा में मावची खानों के महाप्रबंधक थे, के माध्यम से, भारत सरकार ने मेवाड़ सरकार के साथ बातीचत की। उन्होंने एक निजी कम्पनी द्वारा किए गए खानों के पट्टे की क्षतिपूर्त्ति के भुगतान पर मंसूखी प्राप्त कर ली और मेवाड़ सरकार से खानें खोदने का लाइसेंस प्राप्त कर लिया। श्री कोवन को इन प्रचालन कार्यों का प्रभारी बना दिया गया और 1942 की मई के आखिर में काम आरंभ कर दिया। प्रचालन कार्यों को दो चरणों में पूरा किए जाने की योजना बनाई गई हैµ 1. एक विस्तृत चित्रण फलक (प्लेनटेबिल) सर्वेक्षण तथा उसके बाद गहन वेधन कार्य किए जाने हैं। 2. ये कार्य निक्षेपों को खोलकर तथा प्रायोगिक ध ातुक प्रसाधन संयंत्र तथा प्रगालकों की स्थापना करने से किए जाते हैं जैसे ही वेधन कार्य धातु-रेखा व्यवहार्यता के स्थापित होते ही किए जाने हैं। सर्वेक्षण में अब तक