2 भारतीय भूगर्भ विज्ञान सर्वेक्षण के उपयोगिता अनुभाग के क्रियाकलापों का कार्यक्रम - Page 22

विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 7

जो प्रगति हुई है, उसके परिणामस्वरूप, यह आशा है कि धातु-रेखा की ‘‘देयता’’ के संबंध में सूचना, मूलतः प्राप्त होने की संभावना की तुलना में जल्दी प्राप्त हो जाएगी। श्री कोवन द्वारा वेधन उपस्कर आदि के रूप में अपेक्षित अधिकांश मशीनें अब पहुंच गई हैं। दो खनन अभियंता, एक यांत्रिक अभियंता, दो धातु-विज्ञानी तथा तीन सर्वेक्षक श्री कोवन की सहायता करने के लिए नियुक्त किए गए हैं।

कोह-इ-सुल्तान के बुझे हुए ज्वालामुखी में सल्फर निक्षेपों के शोषण का कार्य आपूर्ति विभाग से उपयोगिता शाखा ने ले लिया है और भारतीय भू-विज्ञान सर्वेक्षण का एक अधीक्षक भूवैज्ञानिक इस प्रचालन कार्य का प्रभारी है।

यह शाखा अभ्रक (माइका) के उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास भी कर रही है। भूविज्ञान-सर्वेक्षण का एक अधीक्षक भूविज्ञानी एक नवनिर्मित माइका उत्पादन अनुभाग का प्रभारी है। इस शाखा का काम, उत्पादन को बढ़ाने के लिए आवश्यक आपूर्ति को प्राप्त करने में माइका के खनिकों (माइनर्स) को सभी संभव सहायता प्रदान करना होगा।

शाखा द्वारा वुलफ्रैम, तांबा आदि के संबंध में अन्वेषण का कार्य भी हाथ में लिया गया है, और टिन सम्बंधी संभावना की ओर भी तत्काल ध्यान दिया जा रहा है। मूल उद्देश्य उन खनिजों के संबंध में जिनकी आवश्यकता युद्ध के कार्य के लिए है भारत को यथासंभव आत्मनिर्भर बनाना है।

(च) हाँ, निदेशक, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान तथा वाणिज्यिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी सलाहकार समिति के सदस्य हैं जिसकी स्थापना इस शाखा की सहायता करने के लिए की गई है।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्राः क्या मैं पूछ सकता हूँ कि माननीय सदस्य ने कुछ प्रकार के तकनीकी अधिकारियों/कर्मचारियों का उल्लेख किया, क्या वे सब बर्मा से हटाए गए ब्रिटिश कर्मचारी हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रश्न के इस भाग के मेरे उत्तर में जिन दो

खनन अभियंताओं का उल्लेख किया गया है, उनके संबंध में सूचना यह हैः खनन अभियंता के रूप में नियुक्त दो व्यक्ति श्री स्मिथ तथा श्री रोबोट्टम हैं।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्राः क्या वे सब बर्मा से आए हैं?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वे बर्मा छोड़कर आए हैं। उनके अधीन दो परिवीक्षाधीन व्यक्ति हैं, वे दोनों भारतीय हैं। फिर एक मैकेनिकल इंजीनियर श्री साइमस हैं। वे भी बर्मा से निष्क्रांत हैं। दो धातु विज्ञानियों में से एक भारतीय श्री नारायण, और दूसरा श्री फलेमिंग है। सल्फर से सम्बंधित दो सर्वेक्षक हैं, वे सब भारतीय हैं। इन बर्मा निष्क्रांतों को क्यों नियुक्त करना पड़ा, इसका कारण यह है कि केवल मात्र