166 @ बलात श्रम और बेगार के अधीन अनुसूचित जातियां - Page 213

198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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* कारखाना (संशोधन) विधेयक

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (श्रम सदस्य)ः श्रीमन्, मैं कारखाना अधिनियम, 1934 में और संशोधन करने वाले विधेयक को पुनःस्थापित करने की अनुमति का प्रस्ताव करता हूँ।

सभापति (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः प्रश्न यह हैः

‘‘कारखाना अधिनियम, 1934 में और संशोधन करने वाले विधेयक को पुनःस्थापित करने की अनुमति दी जाए।’’

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः श्रीमन्, मैं विधेयक पुनःस्थापित करता हूं।

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@ बलात श्रम और बेगार के अधीन अनुसूचित जातियां

राव बहादुर एन. शिव राजः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या भारत सरकार के श्रम विभाग का कार्य कृषि-मजदूरों के संरक्षण और कल्याण का है_

(ख) क्या श्रम सदस्य इस तथ्य से अवगत हैं कि 29 और 30 जनवरी, 1944 को कानपुर में आयोजित अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ के वार्षिक अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसमें भारत भर में प्रचलित बेगार और बलात श्रम की भर्त्सना की गयी थी जिसकी अनुसूचित जातियाँ ही केवल शिकार हैं_

(ग) सरकार बेगार की पद्धति को रोकने के लिए क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखती है_ और

(घ) क्या भारत सरकार कानून द्वारा इस पद्धति के उन्मूलन की दृष्टि से जांच के लिए कोई समिति नियुक्त करने का प्रस्ताव करती है?

* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 1, 1944, 3 मार्च, 1944, पृष्ठ 798

@ वही। 7 मार्च, 1994, पृष्ठ 903-4.