विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 203
(च) क्या गैर-परंपरागत क्वार्टर के रखरखाव की लागत परंपरागत क्वार्टर की अपेक्षा अधिक होती है और गैर-परंपरागत क्वार्टर के मामले में पूंजी की वापसी तुलनात्मक रूप से कम होती है जबकि परंपरागत र्क्वाटर सरकार को पर्याप्त राजस्व उपलब्ध कराते हैं_
(छ) यदि (क) के संबंध में उत्तर सकारात्मक है तो गैर-परंपरागत टाइप के क्वार्टरों और पंरपरागत टाइप के क्वार्टरों में सुविधाओं की दृष्टि से अंतर क्यों है जबकि एक जैसे आधार अर्थात् दस प्रतिशत दोनों टाइप के क्वार्टरों का किराया लिया जाता है_ और
(ज) क्या सरकार अपने आधारभूत नियमों में संशोधन करने के लिए तैयार है ताकि उन्हें नितांत वाणिज्य के सिद्धांतों के अनुसार बनाया जा सके और यदि नहीं तो क्यों नहीं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) प्रश्न के पहले भाग का उत्तर सकारात्मक है और बाद के भाग का उत्तर नकारात्मक है।
(ख) नहीं।
(ग) जी हां, जहां तक संख्या (i), (iii), (iv), (v), (vi) और (vii) का संबंध है, डी और ई टाइप के परंपरागत क्वार्टरों के अलावा अन्य क्वार्टरों में नौकर के लिए कमरा होता है तथा परंपरागत क्वार्टरों के बाहर खुले अहाते में अनफिल्टर्ड पानी का कनेक्शन उपलब्ध किया जाता है।
(घ) जी हां।
(घ) नहीं।
(च) प्रश्न के पहले भाग का उत्तर सकारात्मक है।
जहां तक दूसरे भाग का संबंध है, स्थिति इस प्रकार हैः
सरकारी नौकर दोनों प्रकार के क्वार्टरों में रहते हैं और वे मानक किराया अथवा अपने वेतन का 10 प्रतिशत भाग उन क्वार्टरों के किराए के लिए अदा करते हैं, इनमें जो भी कम हो परन्तु परंपरागत क्वार्टरों के मानक किराए अपेक्षाकृत कम होते हैं। अतः अधिकांश कर्मचारी मानक किराया अदा करते हैं।
(छ) दोनों प्रकार के क्वार्टरों में उपलब्ध सुविधाएं उन क्वार्टरों के मानक डिजाइन के अनुसार होती हैं जो परंपरागत और गैर-परंपरागत शैली के रहन-सहन के उपयुक्त तैयार किए जाते हैं। किराया नियमों के अनुसार लिया जाता है।