2 भारतीय भूगर्भ विज्ञान सर्वेक्षण के उपयोगिता अनुभाग के क्रियाकलापों का कार्यक्रम - Page 23

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

वही व्यक्ति हैं जो लीड तथा जिंक संबंधी खनन के विषय में कुछ जानते हैं। वे सब मावची खानों से लिए गए हैं और शायद, माननीय सदस्य जानते हैं कि बर्मा में मावची खानें ही केवल लीड तथा जिंक की खानें हैं। किसी अन्य स्थान पर हमारे पास कोई विशेषज्ञ नहीं था। विभाग की नीति यह है कि जबकि लीड तथा जिंक के

खनन में अनुभव प्राप्त यूरोपियनों को नियुक्त करना अपरिहार्य आवश्यकता है, विभाग यह कदम उठा रहा है कि जहां कहीं भी किसी यूरोपीयन की नियुक्ति की जाएगी वहीं प्रशिक्षित करने के लिए उसके अधीन, एक भारतीय को नियुक्त किया जाएगा ताकि जब यूरोपियन छोड़ेगा तो भारतीय दिमाग का प्रभार संभालने के योग्य होगा।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्राः माननीय सदस्य ने अभी-अभी कहा है कि श्री कावन ने मई, 1942 के अंत में काम आरंभ किया और कि इन अलौह धातुओं, जिंक तथा लीड के संबंध में ब्रिटिश कर्मचारियों की नियक्ति अपरिहार्य थी। इन खानों की खोज कराने की बात भारत सरकार के मन में कब आई और क्या यह बर्मा के पतन के बाद आई, ताकि इन व्यक्तियों के लिए रोजगार की व्यवस्था कर दी जाए जिनकी नौकरी समाप्त कर दी गई है?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं उस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता।

पंडित लक्ष्मीकांत मैत्राः भारत में इन खानों के खोलने व काम कराने की बात सरकार के मस्तिष्क में पहली बार कब आई और इस तमाम समय में सरकार क्या करती रही?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः कदाचित, किसी बाहरी निदेश के बिना बिल्कुल सहजभाव में करती रही।

सरदार संत सिंहः क्या मैं यह पूछ सकता हूँ कि क्या इन खानों में काम करने की आवश्यकता युद्ध प्रयास के लिए व्यवस्था करने के लिए महसूस की गई, या यह बर्मा से इन शरणार्थियों को कुछ रोजगार प्रदान करने के लिए किया गया?

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः निश्चित रूप से नहीं, चूंकि बर्मा से आपूर्ति बंद हो गई, अतः भारत सरकार के लिए अपने निजी स्रोतों का उपयोग करना आवश्यक था।

श्री के.सी. नियोगीः प्रश्न के भाग (घ) के संदर्भ में, मेरे माननीय मित्र ने कहा है कि फिलहाल, पेट्रोलियम को खनिजों में शमिल नहीं किया गया है। क्या पेट्रोलियम को इस कार्यक्रम से बाहर विभाग के विवेक से रखा गया है या इस कारण से शामिल नहीं किया कि सरकार ने भारत में पेट्रोलियम के विकास के लिए किसी अन्य एजेंसी को वचन दिया है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः बिल्कुल नहीं। मेरा उत्तर यह था कि फिलहाल कार्यक्रम में यह शामिल नहीं है, इसका यह अर्थ नहीं कि इसे कार्यक्रम