विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 211
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) जी हाँ।
(ख) 1931 से पूर्व कोई कटौती नहीं की जाती थी परन्तु यह प्रथा अनियमित थी और इसे छोड़ दिया गया।
(ग) भाग (ख) के उत्तर की दृष्टि से अन्य प्रश्न नहीं उठते। भारतीय कारखाना अधिनियम (इंडियन फैक्ट्रीज ऐक्ट) के अधीन कर्मचारी उन पदों के लिए समयोपरि भत्ते के प्राप्त करने का अधिकारी होता है जब वह इस अध्नियम में निर्धारित सामान्य रूप से काम करने वाले घंटों के अतिरिक्त घंटों में काम करता है। समयोपरि भत्ते की गणना करते समय नमाज़ के घंटों को कर्मचारी द्वारा काम पर लगाए गए कुल घंटों में से कम कर दिया जाता है।
सेठ यूसुफ अब्दुल्ला हारूनः क्या माननीय सदस्य यह जानते हैं कि यह परेशानी इसलिए हुई है कि भारत सरकार ने एक घंटे का समय बढ़ा दिया है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं ऐसा विचार नहीं करता।
सेठ युसूफ अब्दुला हारूनः क्या माननीय सदस्य यह सुझाव देते हैं कि नमाज का वक्त बदला जा सकता है क्योंकि सरकार ने अपना समय बदला है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः प्रश्न यह नहीं है कि नमाज का वक्त बदल दिया जाए। प्रश्न यह है कि नमाज के वक्त को समयोपरि कार्य के लिए अनुमति दी जानी चाहिए।
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* भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली को रविवार और अन्य
छुटियों में काम करने के लिए मजदूरी
588. सेठ यूसुफ अब्दुल्ला हारून (काजी मोहम्मद अहमद काज़मी की ओर से) ः क्या श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या यह सच है कि भारत सरकार मुद्रणालय, नई दिल्ली के प्रबंधक के निदेशों के अनुसार कर्मचारी सरकार का तात्कालिक कार्य करने के लिए रविवार और अन्य त्योहारों की छुट्टी में आते हैं परन्तु उन्हें दिन भर काम करने के बाद केवल 4 घंटों की मजदूरी दी जाती है जबकि पहले उन्हें बारह घंटों की मजदूरी दी जाती थी_ और
(ख) क्या सरकार ने उन कर्मचारियों को बारह घंटों की मजदूरी अदा करने की प्रथा को पुनः प्रारम्भ करने पर विचार किया है जो छुट्टियों के दिनों में आठ घंटे काम
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1944, 22 मार्च, 1944