218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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* दिल्ली में भू-स्वामियों की ज्यादतियां 647. श्री कैलाश बिहारी लालः क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) क्या सरकार का ध्यान 12 मार्च, 1944 के दिल्ली में वैश्य समाचार नामक हिन्दी साप्ताहिक में ‘‘दिल्ली में मकानदारों की नादिरशाही’’ शीर्षक के अन्तर्गत प्रकाशित लेख की ओर आकर्षित किया गया है_
(ख) क्या सरकार ने यह जान लिया है कि वास्तव में प्रभावकारी और धनी मकान-मालिक ऐसे अत्याचार करते हैं जिनका लेख में वर्णन किया गया है और वे पुलिस अधिकारियों के सहयोग से ऐसा करते हैं_
(ग) क्या यह सच है, जैसा कि साप्ताहिक पत्रिका में कहा गया है, कि पुरानी दिल्ली में मालीवाड़ा मोहल्ला में मकान का किराया 9 रु. से बढ़कर 21 रुपये 4 आने हो गया है_
(घ) क्या सरकार उन आरोपों का पता करना चाहती है जिन्हें समाचार पत्रिका में बताया गया है तथा पुरानी दिल्ली में मकान किराए के प्रश्न के संबंध में बताए गए तरीके से तानाशाही को रोकने के लिए उचित कदम उठाना चाहते हैं_ और
(घ) पुरानी दिल्ली में उसी प्रकार के कानून को लागू करने में सरकार की क्या-क्या कठिनाइयां हैं, जो कानून नई दिल्ली में विनियमित और लागू हैं?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः स्थानीय प्राधिकारियों के बारे में पूछताछ की जा रही है और शीघ्र ही इस संबंध में उत्तर सभा पटल पर रख दिया जाएगा।
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@ खाद्य विभाग में अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व 648. श्री प्यारे लाल कुरीलः (क) क्या माननीय खाद्य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि खाद्य विभाग और इसके अंतर्गत कार्यकारी और प्रांतीय संगठनों में राजपत्रित और अराजपत्रित कर्मचारियों में अनुसूचित जातियों को सम्मिलित करते हुए साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व क्या है_
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 2, 1944, 27 मार्च, 1944, पृष्ठ 1571-72 @ वही।