विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय) प्रश्न और उत्तर 229
सभापति महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः यह एक तर्क है।
श्री लालचन्द नवलरायः मैं एक प्रश्न कर रहा हूं।
सभापति महोदय (माननीय सर अब्दुर रहीम) ः शांति, शांति।
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* कोयला खानों में भूमिगत स्थलों पर काम करने के
लिए महिलाओं को लगाया जाना
701. श्री के.एस. गुप्ताः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य इस बात से अवगत है कि क्या श्री सोरेन सेन ने भारत में कोयला खानों में काम करने के लिए महिलाओं की भर्ती को सबसे गंभीर और अधोगामी कदम बताया है_
(ख) क्या यह सच है कि खाद्य पदार्थों और जीवन की अन्य आवश्यकताओं का मूल्य युद्ध से पूर्व दरों की तुलना में चार से पांच गुना हो गया है जबकि अधिकांश कोयला
खानों में मजदूरी पूर्व युद्ध की दरों से केवल 50 प्रतिशत अधिक है_
(ग) क्या यह सच है कि महिलाओं को कोयले की खानों में काम करने की अनुमति दी जाती है क्योंकि पुरुषों की आवश्यकता संख्या कोयला-खदानों में काम करने के लिए उपलब्ध नहीं है_
(घ) क्या यह सच है कि कोयला खानों में सेवा की सुविधाएं मजदूरों की आवश्यकताओं की तुलना में बहुत कम हैं जिसके फलस्वरूप पुरुष मजदूर वेतन और अच्छे भविष्य के लिए अन्यत्र सेवा-कार्य खोजने पर बाध्य हुए हैं जो कोयला-खानों की तुलना में कहीं लाभप्रद हैं_ और
(घ) क्या यह सच है कि महिलाओं को कोयले-खानों और भूमिगत स्थलों (अर्थात् कोयलों की खानों के अलावा अन्य खदानों) में इंगलैंड और अमरीका में मना किया जाता है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (क) मैंने इस संबंध में प्रेस-नोटिस देखें हैं।
(ख) मेरे पास इस बारे में सही सूचना नहीं है कि युद्ध से पूर्व की स्थिति की तुलना में कोयला-क्षेत्र में जीवन के रहन-सहन की लागत में वृद्धि हुई है।
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 3, 1944, 30 मार्च, 1944, पृष्ठ 1745