230 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
कोयला-खानों में काम करने वाले लोगों को रियायती दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
(ग) जी हाँ।
(घ) इस बात के साक्ष्य हैं कि कोयला खनन के काम में लगे मजदूरों ने कोयला
खानों के पड़ोस में सैन्य-निर्माण कार्यों में सेवा करने को वरीयता दी। जहां तक सुविधाओं की बात है, मैं 1 मार्च, 1944 के अनेक प्रश्न संख्या 273 के मेरे उत्तर के भाग (ग) की ओर माननीय सदस्य का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा।
(घ) महिलाओं को इंगलैंड में भूमिगत स्थलों पर काम करने की अनुमति नहीं दी जाती। फिर भी महिलाओं को कोयला खानों में ऊपरी सतह पर काम करने के लिए रोजगार दिया जाता है। मेरे पास अमरीका के बारे में कोई सूचना नहीं है।
श्री एन.एम. जोशीः क्या मैं यह पूछ सकता हँ कि क्या यह सच है कि युद्ध से पूर्व दिनों में चावल की कीमत 12 सेर प्रति रुपया थी और अब कोयला क्षेत्रों में
खान में काम करने वालों से 6 सेर प्रति रुपया की कीमत वसूल की जाती है?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मुझे इसकी सही जानकारी नहीं है।
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* कोयला खदानों में भूमिगत स्थलों पर कार्य
करने के लिए महिलाओं को रोजगार
702. श्री के.एस. गुप्ताः (क) क्या माननीय श्रम सदस्य यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या कोयले की कमी का कारण यह है कि भारत सरकार ने भूमिगत स्थलों में काम करने के लिए महिलाओं पर प्रतिबंध हटा लिया है? यदि हाँ तो, क्या सरकार ने इस बात पर विचार किया है कि मानव जीवन का मूल्य कोयला उत्पादन की अपेक्षा कहीं अधिक है_
(ख) क्या माननीय सदस्य यह जानते हैं कि इस प्रकार की अनुमति इंगलैंड या अन्यत्र एक क्षण के लिए भी न सही जाएगी_
(ग) क्या यह सच है कि जीवन की बेहतर दशाएं और पर्याप्त मजदूरी भारतीय कोयला-खदानों के मजदूरों को उपलब्ध नहीं है_
(घ) क्या यह सच है कि वैज्ञानिक ढंग से कोयलों की खुदाई इंगलैंड और अमरीका की तुलना में भारत में उपलब्ध नहीं है_ और
* विधानसभा वाद-विवाद (केन्द्रीय), खण्ड 3, 1944, 30 मार्च, 1944, पृष्ठ 1745-46